लाभ पंचमी : सौभाग्य वृद्धि का दिवस

लाभ पंचमी

लाभ पंचमी/Labh Panchami का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। लाभ पंचमी के समय पर देवी लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। प्रकाश से परिपूर्ण दिवाली के बाद आने वाले इस पांचवें दिन के पर्व में श्री लक्ष्मी-गणेश जी का पूजन कई तरह से सुख व समृद्धि देने वाला होता है, इसी के साथ इस समय पर विशेष रूप से भगवान शिव का पूजन किया जाता है। इस दिन भगवान शिव एवं उनके समस्त परिवार की पूजा होती है। 

लाभ पंचमी को लाभ पंचम, ज्ञान पंचमी तथा सौभाग्य पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। अपने नाम अनुरूप ही यह पर्व जीवन में सौभाग्य एवं लाभ की शुभता को दर्शाता है। इस दिवस पर किए जाने वाले पूजन द्वारा संपूर्ण वर्ष भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

लाभ पंचमी को गुजरात में विशेष रूप से सौभाग्य पंचमी/Saubhagya Panchami एवं  ज्ञान पंचमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन गुजराती नव वर्ष की धारणा भी देखने को मिलती है। अत: इस दिन किया जाने वाला पूजन संपूर्ण वर्ष जीवन में सुख तथा समृद्धि को बनाए रखने वाला होता है। गुजरात क्षेत्र में, दिवाली के पर्व की समाप्ति का समय भी इस त्योहार से जुड़ा हुआ है, क्योंकि दीपावली पर्व की समाप्ति इस दिन हो जाता है, इसलिए यह समय लक्ष्मी जी का आशीष प्राप्त करने का अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर होता है। 

लाभ पंचमी शुभ कार्यों का शुभारंभ

लाभ पंचमी के दिन की जाने वाले धार्मिक कृत्यों द्वारा जीवन में ज्ञान एवं सौभाग्य का आगमन होता है और व्यक्ति का जीवन आने वाले सभी पक्षों में प्रकाशित होता है। यह वह समय होता है जब प्रकाश भी धीरे-धीरे आगे बढ़ता हुआ अंधकार से निकलने के मार्ग को दिखाता है। मान्यताओं के अनुसार लाभ पंचमी का समय ज्ञान एवं लाभ दोनों ही स्थिति को मजबूती देने में सहायक होता है। इस शुभ समय पर लोग कई नए कार्यों का आरंभ करना बहुत ही शुभ माना जाता है। 

कारोबारी लोग इस दिन से अपने बही खातों/Ledger books का आरंभ करते हैं। कुछ लोग अपने विशेष सौदों को इस दिन शुरू करते हैं। इसी के साथ शुभ मांगलिक कार्यों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

ज्ञान प्राप्ति का समय

कुछ स्थानों पर यह समय ज्ञान पंचमी के रूप में भी मनाया जाता है। इस शुभ समय जहां देवी लक्ष्मी का पूजन दिवाली से अब तक आरंभ रहता है, वहीं दूसरी ओर इस दिन सरस्वती माता की पूजा की जाती है। ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती जी के साथ ही ग्रंथों का पूजन भी होता है। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष पंचमी बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास हेतु भी उत्तम होती है। इस समय पर धर्म ग्रंथों का पूजन भी किया जाता है। ज्ञान वृद्धि का समय होता है। वेद पाठ, शिक्षा, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए भी यह समय शुभ होता है। इस समय पर गुरुजनों का आशीर्वाद लिया जाता है। इस अवसर पर परिवार के बड़े बुजुर्गों का आशीष जीवन को शुभता प्रदान करने वाला होता है। 

लाभ पंचमी शुभ मुहूर्त/Labh Panchami Muhurat

पञ्चमी तिथि का प्रारम्भ – 8 नवम्बर, 2021 को 13:16 मिनट पर होगा 

पंचमी तिथि की समाप्ति – 9 नवम्बर, 2021 को 10:35 मिनट पर होगी। 

लाभ पंचमी का त्यौहार 9 नवम्बर, 2021 को मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। लाभ पंचमी की पूजा के लिए प्रातःकाल  06:39 से  10:16 तक का समय शुभ रहेगा। 

लाभ पंचमी पूजन/Labh Panchami Pujan

लाभ पंचमी के दिन श्री लक्ष्मी गणेश तथा भगवान शिव एवं पार्वती का पूजन होता है। लाभ पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त पर उठकर पवित्र जल से स्नान करने के पश्चात पूजा का अनुष्ठान हेतु संकल्प लिया जाता है। इस दिन भगवान सुर्य देव को अर्घ्य प्रदान किया जाता है। पूजा स्थान को साफ सुथरा करने के पश्चात लक्ष्मी गणेश जी के साथ भगवान शिव पार्वती जी की प्रतिमाओं का अभिषेक एवं स्थापना की जाती है। 

कुछ स्थानों पर रंगोली इत्यादि बनाई जाती है तथा कुछ शुभ प्रतीकों को घर के मुख्य द्वार एवं मंदिर स्थल पर अंकित किया जाता है। लाभ पंचमी पूजन के दिन गणेश जी लक्ष्मी जी को फल-फूल, धूप, दीप इत्यादि अर्पित करना चाहिए। भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है, भस्म अर्पित की जाती है, बेल पत्तों, धतूरा इत्यादि भगवान शिव को प्रिय होते हैं, इसलिए उन्हें यह सब सामग्री चढ़ाई जाती है। माता पार्वती को रोली, सिंदूर, लाल रंग की चुनरी वस्त्र इत्यादि अर्पित करने चाहिए। इसके पश्चात पूजा के बाद भगवान को भोग अर्पित करना चाहिए, तथा समस्त परिवार व अन्य लोगों के मध्य प्रसाद को बांटना चाहिए। लाभ पंचमी का त्यौहार जीवन में शुभ व लाभ के आगमन को दर्शाता है। 

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