बिज़नेस ज्योतिष कैसे मदद कर सकता है।

Business Astrology

एक सफल बिजनेसमैन बनने के लिए हमारे प्रयासों के साथ हमारे जीवन में मौजूद शुभ योगों के सहयोग की भी जरूरत होती है। मेहनत तो सभी करते हैं, लेकिन इसी के साथ जन्म कुंडली में बनने वाले योगों का भी जातक के जीवन पर गहरा असर पड़ता है, ज्योतिष शास्त्र में मौजूद कई ऎसे सूत्र हमें कार्यों में सफलता प्राप्ति कराने में सहायक बनते हैं। कई बार हम ऎसा काम करते हैं, जिसमें हमारी मेहनत तो पूरी लगती है, लेकिन फल उस रुप से नही मिल पाता। दिन रात किया जाने वाला परिश्रम अच्छे फल जब नही दे पाता है, तो ऎसी स्थिति में जानना आवश्यक होता है की आखिर कमी कहां रह गई है। इस कमी को बिज़नेस ज्योतिष/ Business Astrology और ज्योतिष में बिजनेस योग/Business yoga in Astrology के द्वारा सहजता से समझा जा सकता है। 

 करियर में किस क्षेत्र की ओर अग्रसर हुआ जाए, इसके लिए आवश्यकता है जन्म कुंडली में बने हुए योग, ग्रह दशा और करियर से संबंधित भाव के सूक्षम अन्वेषण की, जिससे यह जान पाना संभव होता है की स्वयं का कारोबार-बिजनेस कैसा रह सकता है या हमारी कुंडली में ऎसे योग मौजूद भी हैं जो हमें नौकरी से बेहतर कारोबार में सफलता दिला सकते हैं। आईये जानें हमारे लिए कुंडली में कौन से भाव स्थान कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम के लिए देखे जाते हैं/ which house is seen for business success? 

ज्योतिष शास्त्र में कुंडली में मौजूद दशम भाव और सप्तम भाव को कारोबार के लिए देखा जाता है। 7th and 10th house are seen for business success. दशम भाव हमारा कर्म क्षेत्र होता है और सप्तम भाव हमारे कर्म क्षेत्र में साझेदारी या पार्टनरशिप की स्थिति को दर्शाता है। व्यक्ति की जन्म कुंडली में कार्यनिष्ठा किस स्तर की है उसके लिए शनि ग्रह की स्थिति को भी समझने की आवश्यकता होती है, इसी के साथ अन्य ग्रहों की स्थिति भी असर डालती है, लेकिन कार्य में स्वतंत्र होकर आगे बढ़ने कि चाह होना अथवा किसी के अधिनस्थ रह कर कार्य करना इन बातों को सूर्य, शनि, चंद्रमा इत्यादि के शुभाशुभ प्रभाव से समझने की आवश्यकता होती है। 

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कारोबार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए भाव स्थान के अलावा ग्रहों की स्थिति, दृष्टि, युति एवं उनके शुभ एवं अशुभ प्रभाव तथा कुंडली में मौजूद योगों को जान कर ही सफलता या असफलता का मापदण्ड जाना जा सकता है। 

जन्म कुंडली में शनि, राहु, और बुध ग्रह  की स्थिति एक दूसरे को प्रभावित करती है, तो उस स्थिति में व्यक्ति अपना बिजनेस करने का विचार रखता है। यदि इन ग्रहों की स्थिति यदि अनुकूल है और भाव भी शुभ हो तो उस स्थिति में कारोबार में अच्छा करने का अवसर मिलता है। 

ज्योतिष शास्त्र में बुध को व्यापार से संबंधित माना गया है और इसी के साथ बृहस्पति और चंद्रमा भी इस भूमिका में अपना अहम रोल निभाते हैं। कुंडली/Kundli में यदि बुध, गुरु तथा शुक्र परस्पर द्वितीय अथवा द्वादश भाव में स्थित हों तो जातक अपने व्यवसाय द्वारा आजीविका उत्पन्न करने का सामर्थ्य रखता है। 

जन्म कुंडली में सातवां भाव कारोबार को दर्शाता है|  इसी के साथ यह स्थान मिल जुल कर किए जाने वाले बिजनेस से भी संबंधित होता है। कुंडली में सातवें भाव का अधिपति अगर द्वितीय भाव में स्थित हो तथा बुध ग्रह की शिति सातवें भाव में अनुकूल रूप से हो तो इस स्थिति में व्यक्ति बिजनेस द्वारा अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने में सक्षम होता है। 

सप्तम भाव का स्वामी यदि धन भाव में स्थित है और बुध सप्तम भाव में स्थित हो व्यक्ति बिजनेस कर सकता है। ऐसे ग्रह योग वाले व्यक्ति स्वयं का बिजनेस कर सफलता business success प्राप्त कर सकते हैं।

जन्म कुंडली में सातवें भाव से बारहवें भाव तक अथवा दसवें भाव स्थान से तीसरे भाव स्थान तक यदि पंच ग्रहों की स्थिति बनती है, तो उस के प्रभाव से व्यक्ति बिजनेस के क्षेत्र द्वारा धनार्जन करने के लिए आगे रहता है। 

जन्म कुंडली में कर्म भाव अर्थात दसवें भाव का अधिपति अगर केन्द्र त्रिकोण/Kendra trikon में शुभ स्थिति में हो तो बिजनेस द्वारा लाभ प्राप्ति करने में सक्षम होता है और अच्छी सफलता को प्राप्त करता है। 

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जन्म कुंडली में लग्न भाव और उसके अधिपति का दशम भाव और दशम भाव के अधिपति के साथ परस्पर शुभ संबंध बनता है तो जातक को बिजनेस में आगे बढ़ने के अच्छे योग प्राप्त होते हैं। दशम भाव में बुध का प्रभाव अथवा जैमिनी के अनुसार आत्मकारक ग्रह के नवांश में शनि की स्थिति बिजनेस के लिए अनुकूल मानी जाती है और इसमें आगे बढ़ने के अच्छे अवसर प्राप्त होते हैं। कुंडली में बुध की उत्तम स्थिति बिजनेस के लिए शुभ मानी जाती है। इसी के साथ गुरु का उत्तम योग भी एक सफल बिजनेसमैन बनने के लिए प्रेरित करता है। बुध जो बौद्धिकता, वाणी का कारक होता है वह सामान को बेचने की और बातों से दूसरों को आकर्षित करने की बेहतर क्षमता को दर्शाता है। दूसरी ओर गुरु जो ज्ञान का कारक है, तर्क की कुशलता एवं व्यवहारिक ज्ञान की सहजता से जोड़ता है। वह उचित अनुचित की स्थिति से परिचित करवाते हुए अच्छे बिजनेस की आधारशिला को स्थापित करने वाला होता है। इसी के साथ शनि की स्थिति भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को दर्शाती है की व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है या अधीनस्थ इस स्थिति से बिजनेस मैन बनने के गुणों को समझा जाना संभव होता है। 

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