राहु का परिणाम सिद्धांत आपकी कुंडली में कैसे काम करता है?

Kundli me Rahu

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का असर उनका प्रभाव ही फलित सिद्धांत का आधार बनता है. कोई ग्रह कैसे फल देगा ओर उसका असर हम पर किस रुप से पड़ने वाला है यह बात फलित सिद्धांत के अंतर्गत आती है. अब ग्रहों में जब राहु की बात आती है तो इस ग्रह का असर कैसे किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है ये बातें व्यक्ति की कुंडली के आधार पर ही तय हो पाता है. एक साधारण रुप से फलित सिद्धांत अनुसार ग्रहों का असर अपनी स्थिति के अनुसार फल देने की कोशिश करता है. इस तरह राहु कुंडली में/Kundli me Rahu जब जिस रुप में मौजूद होगा तो वह अपना असर देने वाला होता है.

कुंडली में राहु के फलित को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं द्वारा इस को समझा जा सकता है. राहु की स्थिति, युति, राशि, नक्षत्र प्रभाव, शुभता अशुभता का असर, ग्रह योग इत्यादि बातों से हम इसके फलों को कई आयामों में देख सकते हैं. राहु जितना रहस्यमयी और गुप्त है उतना ही इसके फलित सिद्धांत का तथ्य भी है. जिस पर आचार्यों की राय में भी अंतर अवश्य दिखाई देता है. 

राहु का भाव फल 

राहु के प्रभाव/Rahu ka Prabhav में जब भाव फल की बात करते हैं तो इसका प्रभाव भाव के अनुरूप मिलता है. राहु का सभी बारह भावों में बैठने का असर अलग अलग रुप में होता है क्योंकि सभी भाव कुछ विशेष कारक तत्व दर्शाते हैं और उन भाव में राहु अलग रुप से असर दिखाता है. राहु भाव के साथ मिलकर प्रबल रुप से काम करता है. पराशर द्वारा राहु जिस भी घर में बैठता है उसी के अनुसार फल देने की प्रवृत्ति को भी दर्शाता है. अब राहु कुंडली/Kundli me Rahu के कुछ ऐसे भावों में बैठता है जहां वह अच्छा असर देता है तो उसके द्वारा राहु का फलित सिद्धांत काफी महत्वपूर्ण होता है. 

जब यह तीसरे भाव, छठे भाव या बारहवें भाव में बैठता है तो इसके फलों में विस्तार देखने को मिलता है. यह बातें राहु के फलित को काफी अधिक प्रभावित करने वाली होती हैं क्योंकि भाव में विराजमान राहु अपने असर को विस्मित कर देने वाले पक्ष की तरह दिखा सकता है. 

केन्द्र त्रिकोण भाव का प्रभाव भी राहु के फल को प्रभावित करता है. राहु केंद्र त्रिकोण भाव के स्वामी के साथ होता है तो यह एक राज योगकारक स्थिति भी दर्शाती है, ऐसे में राहु के फल काफी प्रभावित करने वाले होते हैं. योगकारक राहु का होना कई मामलों में राहु के खराब फल भी सकारात्मक रुप से काम करते दिखाई देते हैं.

राहु का राशि फल 

राहु का फलित स्वरूप राशि के अनुसार भी होता है. सभी बारह राशियों में राहु की स्थिति भी अलग असर दिखाती है. राहु का कुछ राशियों में होना अच्छा असर दिखाता है तो कुछ स्थान में वह खराब असर भी दिखाता है. राहु का राशियों पर असर भी कुछ ज्योतिष ग्रंथों में योगकारक भी दिखाता है. राहु का मेष राशि में होना, वृश्चिक राशि में होना, मिथुन राशि में होना, कन्या राशि में होना, कर्क राशि में होना, मकर राशि में होना एक योगकारक स्थिति भी मानी जाती है पराशर जी अनुसार ये एक अच्छी स्थिति होती है. अब इसके विपरीत कुछ स्थानों में राहु को अत्यंत शुभ माना जाता है. राहु का वृष राशि मिथुन राशि या कुंभ राशि में होना अत्यधिक अनुकूल शुभ माना जाता है तब उम्मीद की जाती है की राहु एक अच्छी स्थिति और असर देने वाला होगा. राहु का इसके विपरीत कर्क या सिंह राशि में होना खराब फलों को दर्शाता है. ऐसे में राहु की स्थिति राशियों के अनुसार भी अपना फल देती है.

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राहु का युति फल 

कुंडली में राहु/Kundli me Rahu जिस भाव में बैठा हो यदि उस भाव में कोई दूसरा ग्रह भी बैठा हो तो इस स्थिति को युति प्रभाव कहा जाता है. अब इस स्थिति में ग्रहों का एक दूसरे के साथ जब संबंध बनता है तो ग्रहों के असर भी युति योग के कारण काफी प्रभावित होता है. इस संदर्भ में राहु जब किसी ग्रह के साथ होता है तो उस ग्रह के फल देने में काफी कुशल बनता है राहु का फल उसके ग्रह के साथ बैठे ग्रह के गुणों से भी प्रभावित होता है. अब इस में जब राहु ग्रह किसी अन्य पाप या खराब ग्रह के साथ युति योग में हो जैसे मंगल, शनि के साथ होना इसके फल में खराब फल या कठोर फल दिखाई देता है. इसके साथ ही जब राहु अपने शत्रु ग्रह के साथ बैठा होता है तो भी अपने फल को कई तरह से दिखा सकता है. इसमें राहु का सूर्य ग्रह के साथ होना या फिर चंद्रमा के साथ होना कुछ मामलों में काफी अलग असर देगा सोच व्यवहार विचार के फल में युति का असर दिखाई देगा.

राहु का दृष्टि फल 

राहु के फल की प्रकृति पर दृष्टि का असर भी दिखाई देता है. अब राहु पर किसी ग्रह की दृष्टि पड़ रही होती है तो यहां ग्रह के मूलभूत गुण में कुछ बदलाव अवश्य आता है. अब राहु यदि किसी शुभ ग्रह अथवा योगकारक ग्रह की दृष्टि से प्रभावित हो रहा है तो ऐसा होने से राहु से मिलने वाले फल व्यक्ति के लिए विकास और नई चीजों को अपनाने में दिखाई देता है. इसी प्रकार यदि मंगल शनि ग्रह की दृष्टि जब इस पर होती है तो इसके खराब फल वृद्धि पाते हैं. जन्म कुंडली/Janam Kundli में दृष्टि के अनुरूप काफी चीजें ग्रहों से ग्रहण करके विशेष असर दे सकता है.

राहु का वर्ग कुंडली 

राहु के फलों को देखने में राहु की स्थिति को वर्ग कुंडली में भी अवश्य देखना होता है. राहु वर्ग कुंडलियों में यदि अच्छी स्थिति में होगा तो यह तथ्य भी राहु से मिलने वाले फलों को दिखाने वाला होता है. राहु वर्ग कुंडली में/Kundli me Rahu जिन ग्रहों, राशि में होता है तब उसका असर भी राहु के फलों में दिखाई देता है.

इस प्रकार से राहु के फलित सिद्धांत को समझने के लिए जरुरी है की राहु की प्रकृति के साथ साथ कुंडली में राहु/Rahu in the horoscope की स्थिति को भी देखा जाए. ग्रह कुंडली में मौजूद स्थिति से अपना असर दिखाता है यही फलित के निर्धारण में काफी विशेष स्थान रखता है.

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