राहु-केतु कैसे डालते हैं आपके जीवन में असर

Rahu aur Ketu

वैदिक ज्योतिष में 9 ग्रह माने गए हैं और इनमें से 7 ग्रह प्रत्यक्ष व स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होते हैं. लेकिन  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और केतु/Rahu aur Ketu दो ऐसे ग्रह हैं जिनका वास्तव में कोई भी भौतिक स्वरूप नहीं है. राहु और केतु को आमतौर पर अशुभ व पाप ग्रह माना जाता है। राहु और केतु/Rahu aur Ketu चंद्रमा व पृथ्वी की कक्षा के दो कटान बिंदु हैं इसलिए ये अदृश्य तत्व हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार ये दोनों ग्रह मिलकर सूर्य व चंद्रमा को ग्रहण लगाते हैं.

 

ये दोनों ग्रह हमेशा एक दूसरे से 180 डिग्री दूर होते हैं। पाश्चात्य ज्योतिष में इन्हे उत्तरी और दक्षिणी नोड भी कहा जाता है। जब सूर्य व चंद्रमा राहु व केतु के नजदीक होते हैं तब सूर्यग्रहण/Surya Grahan या चंद्रग्रहण/Lunar Eclipse घटित होता है. राहु और केतु को सभी ग्रहों में सर्वाधिक बलवान व शक्तिशाली माना जाता है.

 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु भ्रम, भय, छलावा, जुनून, विदेश व अनजाने रोग का कारक है. राहु मनुष्य के अंदर सांसारिक मोह व भौतिकतावादी सोच पैदा करता है. यह मनुष्य को भौतिकता की ओर उन्मुख करता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति सांसारिक चकाचौंध व मोह-माया में लिप्त रहता है. ये व्यक्ति को आकस्मिक प्रसिद्धि, लालच, जुनून, हेरफेर, षड़यंत्र, कूटनीति प्रदान करता है. ये स्वभाव से वात प्रकृति का है। यह राजनेताओं, अपराधियों व स्मगलरों का कारक ग्रह है. बली राहु राजनीति, शक्ति, सत्ता व उच्च पद भी प्रदान करता है. कुंडली में राहु/Kundli me Rahu की अशुभ स्थिति कई बार व्यक्ति को अनुचित कार्यों व साधनों के माध्यम से ऊपर उठने की शक्ति प्रदान करती है। राहु चोरों, जेल, सांप, जहर और विदेश यात्रा/Foreign Travel Prediction का भी कारक ग्रह है.

 

राहु के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति गलत दिशा या गलत मार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है. हालांकि कुंडली/Kundli में राहु की शुभ स्थिति व्यक्ति को अचानक समृद्धि, प्रसिद्धि, सफलता, सट्टेबाज़ी व लॉटरी के क्षेत्रों से लाभ भी प्रदान करती है. राहु आपकी सांसारिक मनोकामनाओं की पूर्ति करता है तो केतु आपकी आध्यात्मिक प्यास बुझाता है. केतु का प्रभाव सांसारिक विषयों के लिए अकसर कष्टकारी होता है. केतु अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गूढ़ व गुप्त विधाएँ, आयुर्वेद, चिकित्सा, तंत्र-मंत्र, ज्योतिष योग, हीलिंग साइंस आदि का कारक ग्रह है. केतु पित्त प्रकृति वाला ग्रह है. केतु व्यक्ति को सांसारिक विषयों की ओर न मोड़कर आध्यात्मिक क्षेत्रों की ओर मोड़ता है.

 

राहु को सिर तो केतु को निचला धड़ माना जाता है। केतु व्यक्ति को उत्तम अंतर्ज्ञान शक्ति प्रदान करता है. केतु के शुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति गूढ़ व जटिल विषयों को समझने में सक्षम होता है. यह आपके आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि कर सकता है. केतु के प्रभाव से व्यक्ति हीलिंग व उपचार की कला में निपुण हो सकता है.

 

राहु और केतु/Rahu aur Ketu का कोई भी भौतिक स्वरूप नहीं है ये चंद्र और पृथ्वी की कक्षा के मात्र दो कटान बिंदु हैं इसलिए इन्हे ज्योतिष शास्त्र में छाया ग्रह कहा जाता है. कुछ लोग ये तर्क देते हैं कि जब राहु व केतु का कोई भी भौतिक स्वरूप नहीं है तो ये लोगों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं? लेकिन छाया का भले ही कोई भौतिक स्वरुप न हो फिर भी उसका प्रभाव मनुष्य पर पड़ सकता है. उदाहरण के लिए अगर आप भयंकर गर्मी के समय पर किसी वृक्ष की छाया के नीचे खड़े हो जाएं तो आपको गर्मी से राहत महसूस होती है. अगर पेड़ की छाया ही न बनें और उसके नीचे भी धूप आती हो तो पेड़ हमें गर्मी से बचा नहीं पाएगा।

 

वास्तव में पेड़ नहीं उस पेड़ की छाया हमें गर्मी से बचाती है. अगर पेड़ की छाया मनुष्य पर इतना प्रभाव डालती है तो चंद्रमा व पृथ्वी की कक्षा के दो कटान बिंदुओं की छाया हम पर प्रभाव क्यों नहीं डाल सकती? राहु और केतु/Rahu aur Ketu छाया ग्रह होने के कारण एक अदृश्य ऊर्जा हैं जिनका प्रभाव समूची मानव जाति पर अवश्य पड़ता है. राहु और केतु का प्रभाव/Rahu Ketu ka Prabhav बड़े व सामूहिक स्तर पर पड़ता है. राहु व केतु के कारण महामारियां, भूकंप, सामूहिक हत्याकांड या हिंसा, बम विस्फोट, प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, तूफ़ान आदि घटनाएं होती हैं.

 

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