विवाह के बाद कुंडली मिलान का क्या फायदा होगा

Horoscope matching

कई बार जन्म कुंडलियों का मिलान/Horoscope matching उस रूप से नहीं हो पाता है जो ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। सिर्फ गुण मिलान ही विवाह के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में यदि आप अपने दांपत्य जीवन में सुख की कमी नहीं चाहते हैं तो विवाह से पूर्व कुंडली मिलान/Kundli Milan करना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है।

एक छत के नीचे रहते हुए भी क्यों बने हुए हैं अजनबी?

विवाह के बाद वैवाहिक संबंधों/Marital relationship के सुख में कमी एक जगह पर रहते हुए भी नही मिल पा रही है, तो इसका मुख्य कारण कुंडली के सप्तम भाव/Seventh House का पाप प्रभाव में होना अथवा सप्तमेश का व्ययेश से संबंध होना शैय्या सुख को प्रभावित करने वाला होता है। ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे उपाय हैं, जो इन सभी खराब प्रभावों को दूर करके वैवाहिक संबंधों के सुख प्रदान करने में सहायक साबित हो सकते हैं। इसलिए विवाह पश्चात होने वाली किसी भी समस्या का ज्योतिषीय सलाह द्वारा हल किया जा सकता है।

शादी के बाद भी आखिर क्यों नही रह पाए साथ? आखिर क्यों बनी हुई है दूरी?

कुंडली/Horoscope में सप्तम भाव एवं उसके अधिपति का यदि किसी पाप ग्रह के साथ संबंध बन रहा है, या फिर सप्तम भाव का स्वामी अस्त हो रखा है या वक्री होकर छठे, अष्टम या द्वादश भाव से प्रभावित है, तो ऐसे में विवाह पश्चात भी पति पत्नी के रिश्ते में किसी न किसी कारण से दूरियां पनपने लगती हैं। ऎसे में यदि पोस्ट मैरिज काउंसलिंग/Post marriage counseling को अपनाया जाए तो इन सभी मुश्किलों से बचाव संभव हो सकता है। 

क्या तलाक होने से रुक सकता है?

कई बार ऐसा होता है की एक व्यक्ति शायद तलाक लेना चाहे, लेकिन दूसरा इसके बिल्कुल विपरीत हो। ऐसे इस बात की अधिक संभावना होती है कि जो तलाक को रोकना चाहता है वह अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करता/करती है। ऐसे में ज्योतिष शास्त्र में इस बात को समझने में बहुत सहायक होता है की आखिर कौन सा ग्रह विवाह को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है और अगर उसका उपाय समय रहते कर लिया जाए तो तलाक जैसी स्थिति से आसानी से बचा जा सकता है। ज्योतिष ही वह जरिया है जिससे दांपत्य जीवन का सुख प्राप्त किया जा सकता है। 

पोस्ट मैरिज काउंसलिंग कैसे बेहतर बना सकती है मेरे शादीशुदा जीवन को 

कई बार शादीशुदा जीवन में तनाव इतना बढ़ जाता है की दोनों साथी ही अलग-अलग होने का विचार मन में बनाने लगते हैं या कई बार यह स्थिति एक ओर से कुछ ज्यादा ही अधिक रह सकती है तथा दूसरा व्यक्ति सुलह की इच्छा रख सकता है। वैवाहिक जीवन में ऐसे बहुत से कारण बनते हैं जिसके चलते जीवन एक साथ गुजारना मुश्किल लगने लगता है। ऐसे में पोस्ट मैरिज काउंसलिंग/Post marriage counseling एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। 

वैवाहिक जीवन में अलगाव और दूरी क्या शनि के कारण बन सकती है। 

जन्म कुंडली में विवाह भाव/Marriage house पर जब शनि की दृष्टि पड़ती है या फिर सूर्य-केतु का युति संबंध बनाता है, तो इस कारण दांपत्य जीवन का सुख कम मिलता है और रिश्ते में अलगाव या दूरी आने लगती है। ऐसे में इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए विवाह से पूर्व कुंडली का मिलान यदि सही प्रकार से किया जाए तो इन परेशानियों से निजात मिलना संभव हो सकता है। 

वैवाहिक जीवन में एक दूसरे से सच छुपाना या फिर विवाहेतर संबंधों का होना 

सच्चाई-विश्वास एवं भरोसे हर रिश्ते की नींव होती हैं और जब साथी सच छुपाने लगे तो राहु का प्रभाव ही उसे इन बातों में फंसाने वाला भी होता है। वहीं साथी के होते हुए भी किसी दूसरे के प्रति मन में लगाव होना भी पाप प्रभाव एवं सप्तम भाव के वक्री एवं खराब स्थिति में होने के कारण ही होता है। इन बातों से बचने में पोस्ट मैरिज काउंसलर/Post marriage counselor का सहयोग बहुत ही सहायक व सकारात्मक बनता है जो वैवाहिक संबंधों की आधारशिला को मजबूती देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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