स्त्रियों के नवम भाव में बैठा केतु उन्हें कैसे परिणाम देगा?

ketu in 9th house

जन्म कुंडली का नौवां भाव सर्वाधिक शुभ भावों में से एक है. इस भाव की गणना त्रिकोण भावों (01, 5, 9 भाव) में होती है. इस भाव से पिता, गुरु, भाग्य, उच्च शिक्षा, धर्म, अध्यात्म व ईश्वर में आस्था, कानून, लंबी यात्राएं, विदेश यात्रा, तीर्थ यात्रा, परोपकार, दान, पुण्य, आध्यात्मिक साधना, धार्मिक कार्य, जांघ, कूल्हे आदि का विचार किया जाता है. यह भाव कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण भाव है क्योंकि इस भाव से किसी भी व्यक्ति के भाग्य का विचार किया जाता है. उत्तम भाग्य के बिना व्यक्ति को पग-पग में संघर्ष व असफलता का सामना करना पड़ सकता है.

 

दुर्भाग्य के कारण ही कुछ लोगों को अपने जीवन में आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता वही कुछ लोग ऐसे होते हैं जो उत्तम भाग्य के बल पर एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले जाते हैं. जिस व्यक्ति का नवम भाव बली होता है वह व्यक्ति भाग्यवान होता है। इसके साथ ही नवम भाव से व्यक्ति के धार्मिक दृष्टिकोण का पता भी चलता है इसलिए इसे धर्म भाव भी कहते हैं. इस भाव से किसी भी व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन का विचार किया जाता है। नवम भाव के बली होने से आपको जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता मिल सकती है.

 

अब नवम भाव में स्थित केतु की बात करते हैं. नवम भाव में स्थित केतु/Navam bhav me Ketu आध्यात्मिक विषयों के लिए बहुत ही शुभ होता है क्योंकि कुंडली का नवम भाव धर्म, अध्यात्म, ईश्वरीय भक्ति आदि से जुड़ा है और केतु भी धर्म, अध्यात्म, मोक्ष, वैराग्य व अध्यात्म से जुड़ा ग्रह है इसलिए नवम भाव में बैठा केतु/Navam Bhav me ketu आध्यात्मिक विषयों के लिए वरदान साबित हो सकता है. आप उच्च कोटि की आध्यात्मिक आत्मा हो सकते हैं. आप धार्मिक व आध्यात्मिक गतिविधियों व साधनाओं में लिप्त रह सकते हैं. आप तंत्र-मंत्र, अध्यात्म, ज्योतिष योग/astrology yoga व आध्यात्मिक विषयों के जबरदस्त जानकार व विद्वान हो सकते हैं. आप अपने जीवन में अनेक तीर्थयात्राएं कर सकते हैं.

 

आप अपने गुरु के परम भक्त हो सकते हैं. आप गणेश जी से संबंधित आध्यात्मिक साधनाएं कर सकते हैं. लेकिन यहाँ स्थित केतु सांसारिक विषयों के लिए खराब होता है. केतु के इस भाव में होने से आपके भाग्य में अनेक उतार-चढ़ाव लगे रह सकते हैं. आपको पिता का सुख कम मिल सकता है. आप अपने पिता से दूर हो सकते हैं या पिता से आपका मनमुटाव हो सकता है. आपकी उच्च शिक्षा अधूरी रह सकती है. आपको जाँघों व कूल्हों से जुड़ा रोग हो सकता है. यहाँ स्थित केतु कुंडली/Kundli के तीनों त्रिकोण भावों (1 5, 9 भाव) को अपनी स्थिति या दृष्टि द्वारा प्रभावित करता है. इसके अलावा केतु इस भाव से तृतीय भाव/Tisara Bhav को भी दृष्ट करता है. आपको छोटे भाई-बहनों व संतान का सुख कम मिल सकता है. आपकी जांघ या कूल्हे पर कोई निशान हो सकता है या आपको जाँघों से जुड़ा कोई रोग हो सकता है. आपकी सेहत प्रतिकूल रह सकती है.

 

आपकी कुछे के संतानें नष्ट भी हो सकती हैं. शेयर मार्केटिंग या सट्टे-लॉटरी से आपको बड़ा नुकसान हो सकता है. आप डिप्रेशन व मानसिक रोगों के शिकार हो सकते हैं. आपको प्रेम संबंधों/Love Relationship से निराशा हाथ लग सकती है. आपकी बुद्धि भ्रमित हो सकती है. आपकी निर्णय शक्ति प्रभावित हो सकती है. छोटी व लंबी यात्राओं से आपको नुकसान हो सकता है. सफलता प्राप्ति के लिए किए गए प्रयास विफल रह सकते हैं. नवम भाव/Navam Bhav को पिता का कारक भाव माना जाता है।

 

केतु एक पापी ग्रह है इसलिए नवम भाव में केतु/Navam bhav me Ketu होने से आपके पिता का स्वास्थ्य गड़बड़ रह सकता है या आपके अपने पिता से ख़राब संबंध हो सकते हैं. यदि नवम भाव में स्थित केतु/Navam bhav me Ketu शुभ स्थिति में हो तब आपके पिता धार्मिक विचारों वाले या किसी मंदिर के पुजारी हो सकते हैं। आपके छोटे भाई- बहनों व बच्चों का जीवन बेहद संघर्षमय हो सकता है. आपके पड़ोसी आध्यात्मिक विचारधारा के हो सकते हैं.

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