क्या केतु ग्रह भ्रम पैदा करता है?

Chandra Budh Ketu ka prabhav

जीवन में कई बार कुछ लोग अनजाने भय व भ्रम का शिकार हो जाते हैं तो कुछ लोगों को बार- बार वहम होने की समस्या हो सकती है. ये सब लक्षण मानसिक कमजोरी के प्रतीक है. जो लोग अक्सर बहुत ज्यादा सोचते हैं या तनाव लेते हैं उन्हें इस प्रकार की समस्या अधिक सताती है. जब डर, वहम या भ्रम की समस्या गंभीर हो जाती है तो कुछ लोग डॉक्टरों के चक्कर भी काटते फिरते हैं. ऐसे में जब व्यक्ति चिकित्सीय इलाज कराने के बावजूद ठीक नहीं हो पाता है तब ज्योतिषीय सलाह या मार्गदर्शन लेने की कोशिश करता है.

 

इस समस्या के समाधान के लिए ज्योतिष विद्या काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. कुंडली में क्रूर व पाप ग्रहों के कारण भी व्यक्ति को अनजाना भय सताने लगता है। भ्रम या वहम मन से जुड़ी हुई समस्या है। चंद्रमा की खराब स्थिति के कारण मन का विचलित होना, भ्रम या वहम पैदा होना और डर लगने जैसी परेशानियां हो सकती हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के कुछ विशेष भाव व ग्रह हमारी सोच व मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं. मन का कारक चंद्रमा व बुद्धि का कारक बुध ग्रह है. कुंडली का चतुर्थ और पंचम भाव क्रमशः हमारे मन और बुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं. शनि, राहु और केतु क्रूर व पाप ग्रह हैं. इनमें भी पीड़ा देने के मामलें में केतु ग्रह का स्थान सर्वप्रथम है. राहु की तरह केतु भी मन में भ्रम पैदा करता है। चंद्रमा और केतु की स्थिति मन में विचित्र समस्याएं पैदा करती है।

 

राहु की तरह केतु भी एक छाया ग्रह है जिसका भौतिक स्वरूप नहीं है इसलिए भ्रम पैदा करना केतु का एक गुण है. केतु का प्रभाव तीव्र, स्थायी, जटिल और आकस्मिक होता है. किसी भी कुंडली में जब मन व बुद्धि के स्वामी क्रमशः चंद्रमा बुध व केतु के प्रभाव/Chandra Budh Ketu ka prabhav में हो तो व्यक्ति को बार-बार भ्रम होने की समस्या होती है. केतु का एक गुण किसी भी चीज में अवरोध (ब्लॉक) उत्पन्न करना है इसलिए जब चन्द्रमा व बुध पर केतु का प्रभाव/Chandra Budh Ketu ka prabhav हो तो व्यक्ति की मानसिक क्षमता व सोचने-समझने की क्षमता में बाधाएं आने लगती है. ऐसे व्यक्ति अधिकतर काफी कन्फ्यूजन में रहते हैं. चंद्र केतु या बुध केतु का संयोग कई बार मानसिक विकार पैदा करता है और व्यक्ति को डिप्रेशन, मानसिक अशांति आदि की समस्या हो सकती है। अगर चंद्रमा या बुध अपनी नीच राशि यानी वृश्चिक और मीन राशि/Meen Rashi में हों तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है. 

 

इसके अलावा चतुर्थ भाव/Fourth House व चतुर्थेश का संबंध व्यक्ति के मन से है और पंचम भाव व पंचमेश का संबंध व्यक्ति की बुद्धि से होता है. अगर चतुर्थ भाव में केतु हो या चतुर्थेश केतु की युति या दृष्टि द्वारा पीड़ित हो तो व्यक्ति के मन में तरह तरह के भ्रम पैदा हो सकते हैं. पंचम भाव में केतु/Ketu in the Fifth House हो या पंचमेश केतु की युति या दृष्टि द्वारा पीड़ित हो तो भी व्यक्ति को बार-बार भ्रम होने की शिकायत हो सकती है. चतुर्थ व पंचम भाव/Fifth House और इनके स्वामियों के केतु से पीड़ित होने पर दिमागी सोच व मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है. अगर चंद्रमा या बुध कुंडली/Kundli में बहुत कमजोर स्थिति में हो और केतु द्वारा पीड़ित हो और इन दोनों ग्रहों की महादशा/अंतर्दशा चल रही हो तो इस अवधि में भ्रम, डर या वहम की समस्या काफी बढ़ सकती है. केतु की महादशा/Ketu Mahadasha के दौरान भी व्यक्ति अनजाने भय व भ्रम से बार बार पीड़ित हो सकता है.

भ्रम या वहम को दूर करने के उपाय

 

  • प्रतिदिन प्रातः उठकर नहाने के बाद सूर्यदेव को ताँबे के पात्र से जल चढ़ाना चाहिए।  
  • केतु ग्रह से संबंधित वस्तुएं जैसे कंबल, छाता, लोहा, उड़द, गर्म कपड़े, कस्तूरी आदि का दान मंगलवार को करना चाहिए। 
  • अगर कुंडली के लिए चंद्रमा व बुध शुभ कारक ग्रह हो तो क्रमशः मोती व पन्ना धारण करना चाहिए।  
  • मांसाहार, मादक पदार्थ व तामसिक वस्तुओं के सेवन से बचना चाहिए।  
  • भगवान शिव का नियमित पूजन करना चाहिए।
  • चंद्रमा, बुध व केतु ग्रह का रोजाना एक माला जाप करना चाहिए। 

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