हिंदू नववर्ष की पहली कामदा एकादशी पर बनेगा सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग

kamada ekadashi

भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए कामदा एकादशी सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। हिंदू पंचांग के अनुसार एक साल में चौबीस एकादशियाँ आती हैं। वहीं अगर किसी वर्ष मलमास या फिर अधिक मास पड़ता है तो इनकी संख्या बढ़कर छब्बीस हो जाती है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है, वह कामदा एकादशी के नाम से जानी जाती है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी व्रत रखता है उस पर श्री हरि विष्णु जी की विशेष कृपा बरसती है। इस व्रत को करने से समस्त पापों का नाश होता है। प्राचीन धर्मग्रंथों के अनुसार इस व्रत को करने से अनंत कोटि पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत को करने से सात्विकता बढ़ती है और पापों का समूल नाश होता है और मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से भगवान श्री हरि विष्णु प्रसन्न होकर अपने भक्त के समस्त मनोरथ पूर्ण करते हैं और अटके हुए कार्यों में सफलता मिलती है।

चलिए अब आपको बताते हैं कामदा एकादशी 2022 की तारीख, पूजन विधि और मुहूर्त के बारे में। 

कामदा एकादशी 2022 में कब मनाई जाएगी?

इस वर्ष कामदा एकादशी 2022 में 12 अप्रैल, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी।

कामदा एकादशी 2022 पूजन मुहूर्त

कामदा एकादशी पूजन मुहूर्त (दिल्ली के लिए) – प्रातः 10:46 से दोपहर 01:58 तक

एकादशी तिथि प्रारम्भ – 12 अप्रैल 2022 को प्रातः 04:30 से  

एकादशी तिथि समाप्त – 13 अप्रैल 2022 को प्रातः 05 :02 तक  

कामदा एकादशी पारण (व्रत खोलने का) समय – 13 अप्रैल 2022 को दोपहर 01:39  से शाम 04:12 तक 

इस बार की कामदा एकादशी कुछ विशेष रहेगी क्योंकि हिन्दू पंचांग/Panchang के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग जैसे दो शुभ और शक्तिशाली योग बन रहे हैं। इन शुभ योगों के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत सौभाग्यशाली व उत्तम फलदायी सिद्ध हो सकता है। कामदा एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 06 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, इसी बीच शक्तिशाली रवि योग भी रहेगा जो अनेक कुफलों का नाश करने वाला अत्यंत शुभ योग है। इस अवधि के दौरान भी श्री हरि विष्णु जी का नाम स्मरण, मन्त्र जाप व पूजा-पाठ करना काफी लाभकारी हो सकता है।   

कामदा एकादशी 2022 पूजन विधि 

कामदा एकादशी/Kamda Ekadashi 2022 के दिन व्रत और पूजा का प्रारंभ श्री सूर्यदेव को प्रणाम करने के साथ करें। 

  • इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें। 
  • इसके उपरांत ताँबे के पात्र में थोड़ी सी रोली, गुड़ की डली व लाल पुष्प डालकर गायत्री मंत्र अथवा सूर्य मंत्रों का उच्चारण करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्‍य दें। 
  • इसके बाद घर के मंदिर या पूजास्‍थल को अच्छी तरह से साफ़ करके गंगाजल छिड़ककर पवित्र कर लें। 
  •  अब पूजा स्थल में एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। 
  • अब हाथ में जल लेकर व्रत व पूजन को सफलतापूर्वक पूर्ण करने का संकल्प लें।
  •  इसके उपरांत श्री हरि व माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को हल्दी या पीले चंदन से तिलक करके पीले पुष्पों की माला अर्पित करें। 
  •  अब शुद्ध घी या तेल का दीपक और धूपबत्ती को प्रज्वलित करके तुलसी दल अर्पित करें। 
  • इसके बाद एकादशी व्रत की कथा, श्री विष्णु सहस्त्रनाम, श्री विष्णु चालीसा आदि का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
  • पाठ के बाद विधिवत आरती उतारें और प्रभु को भोग अर्पित करें। 
  • इस पावन दिवस पर संध्याकाळ की पूजा के बाद तुलसी जी के आगे घी का दीपक अवश्य जलाएं क्योंकि तुलसी जी को प्रसन्न करने से भगवान विष्णु अपने आप ही प्रसन्न हो जाते हैं। 
  • आप चाहे तो संध्याकाळ में भगवान विष्णु के निम्नलिखित मंत्रों में से किसी एक मंत्र का जाप श्रद्धापूर्वक कर सकते हैं। 

विष्णु मंत्र-

  • हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
  • हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। 
  • ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्। 
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। 
  • ॐ नमो नारायणाय नम:

एकादशी का महत्व 

  • एकादशी पर्व के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। 
  • इस दिन अन्न, तिल, वस्त्र, फलों का दान करना चाहिए। 
  • एकादशी पर गंगा स्नान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। 
  • इस दिन मंदिर में किसी ब्राह्मण को केसर, केला, गुड़ और चने की दाल का दान करना बहुत शुभ फलदायक होता है। 
  • इस दिन गौमाता को हरा चारा अवश्य खिलाना चाहिए।

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एकादशी पर भूलकर भी न करें ये काम 

  • एकादशी पर्व के दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। 
  •  इस दिन  प्याज और लहसुन का सेवन भी पूर्णतया वर्जित है। 
  • इस दिन किसी भी प्रकार के तामसिक अन्न या आहार का सेवन न करें। 
  •  इस दिन किसी की भी निंदा न करें और अभद्र भाषा का प्रयोग करने से बचें। 
  • इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। 
  • इस दिन अधिक बोलने से बचें और जहाँ तक हो सके प्रभु के नाम या मंत्र का मानसिक जाप अधिकाधिक करें। 

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