जन्म कुंडली के किस भाव में केतु की स्थिति शुभ होती है?

केतु

नवग्रहों में केतु को पाप ग्रहों की श्रेणी में शामिल किया गया है. राहु की तरह केतु भी एक छाया ग्रह है और इसका भौतिक स्वरूप नहीं होता है. केतु मंगल के समान एक उग्र प्रकृति का ग्रह है. केतु स्वभाव से एक आध्यात्मिक ग्रह है इसलिए सांसारिक विषयों में इसकी अरुचि है. केतु का प्रभाव/ketu ka prabhav बहुत तीव्र, गहन और आकस्मिक होता है. केतु तंत्र-मंत्र, ज्योतिष, योग, मोक्ष, चोट, आध्यात्मिकता, वैराग्य, गूढ़ विज्ञान आदि का कारक है. केतु मंगल के समान तीव्र व आक्रामक ग्रह है इसलिए चोट, हिंसा, हत्याकांड, सर्जरी आदि से भी इसका संबंध है.

 

अगर सांसारिक विषयों की बात करें तो केतु को जन्मकुंडली के त्रिषडाय भावों(3, 6, 11 भाव) में  सर्वाधिक शुभ माना जाता है. लेकिन अगर आध्यात्मिक विषयों की बात करें तो केतु मोक्ष त्रिकोण (4, 8, 12 भाव) के सिर्फ अष्टम व द्वादश भाव में ज्यादा लाभकारी होता है. तीसरे भाव में स्थित केतु व्यक्ति के साहस, पराक्रम, शारीरिक शक्ति व संघर्ष क्षमता में वृद्धि करता है. यहाँ स्थित केतु व्यक्ति में आत्मबल का संचार करता है और व्यक्ति मुश्किलों में आसानी से हार नहीं मानता है. तीसरे भाव में स्थित केतु/Ketu in the Third House व्यक्ति को लीडरशिप क्वालिटी भी देता है. यहाँ स्थित केतु आपके बाहुबल में जबरदस्त रूप से वृद्धि करता है. छठा भाव रोग, ऋण, शत्रु, विवाद आदि से जुड़ा है. यहाँ स्थित केतु के कारण/ketu ka prabhav आप अपने विरोधियों पर भारी पड़ सकते हैं.

 

शत्रु पक्ष से आपका बचाव होता है. ऋण, रोग व विवादों से सुरक्षा होती है. ग्यारहवां भाव/Eleventh House त्रिषडाय भावों की श्रृंखला में अंतिम भाव है. वैसे तो इस भाव में सामान्यतः सभी ग्रह शुभ माने जाते हैं लेकिन यहाँ स्थित केतु व्यक्ति की अनेक अरिष्टों से रक्षा करता है. यहाँ स्थित केतु आपकी इनकम में वृद्धि करता है और आपकी अनेक इच्छाओं की पूर्ति कर सकता है. ऐसा व्यक्ति आध्यात्मिक विषयों से अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकता है. अष्टम भाव कुंडली के सभी बारह भावों में से सबसे अधिक गूढ़, जटिल व रहस्यमयी भाव है. इस भाव से आध्यात्मिकता का गहन संबंध है. अष्टम भाव में आकस्मिकता का गुण भी छिपा है क्योंकि अष्टम भाव/Eight House व अष्टमेश आकस्मिक रूप से प्रभाव डालते हैं. 

अध्यात्म, गूढ़ व रिसर्च संबंधी विषयों के लिए इस भाव का विश्लेषण किया जाता है. केतु भी काफी गूढ़, जटिल, आध्यात्मिक व आकस्मिक रूप से प्रभाव डालने वाला ग्रह है. इसका भौतिक स्वरूप नहीं होने के कारण यह राहु की तरह रहस्यमयी ग्रह भी है. केतु और अष्टम भाव के गुणों में काफी समानता है इसलिए अष्टम भाव में बैठा केतु/Ketu in the Eighth House आध्यात्मिक विषयों के लिए वरदान साबित हो सकता है. यहाँ स्थित केतु के कारण/ketu ka prabhav व्यक्ति उच्च कोटि की आध्यात्मिक आत्मा होता है. गूढ़ व आध्यात्मिक विषयों पर उसकी जबरदस्त पकड़ होती है. ऐसा व्यक्ति रिसर्च संबंधी क्षेत्रों में अपना विशेष योगदान दे सकता है. बारहवें भाव और केतु के गुणों में भी काफी समानता है इसलिए केतु को इस भाव में शुभ माना जाता है. कुंडली/Kundli का अंतिम भाव होने के कारण बारहवां भाव अंत, हानि या मोक्ष को दर्शाता है. अकेलेपन व एकांतवास से भी इस भाव का संबंध है. आत्मज्ञान की प्राप्ति भी व्यक्ति को इस भाव की शुभता के कारण होती है इसलिए गूढ़ व आध्यात्मिक विषयों से इस भाव का भी गहन संबंध है.

केतु एक आध्यात्मिक ग्रह होने के कारण बारहवें भाव/Twelfth House में प्रसन्न अवस्था में होता है क्योंकि इस भाव के गुण व केतु के गुणों में काफी समानता है. यहाँ स्थित केतु के कारण/ketu ka prabhav व्यक्ति आत्मज्ञान प्राप्त करने हेतु कठोर साधनाएं कर सकता है. व्यक्ति को गूढ़ व आध्यात्मिक विषयों का जबरदस्त ज्ञान हो सकता है. शरीर त्यागने के बाद ऐसा व्यक्ति मोक्ष गति को प्राप्त कर सकता है. कई उच्च कोटि के आध्यात्मिक साधकों के बारहवें भाव में केतु स्थित होता है. इसके अलावा यहाँ स्थित केतु गुप्त शत्रुओं, व्यय व हानि से बचाव भी करता है.

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