Budhaditya Yoga – सूर्य और बुध का वृश्चिक राशि में संगम

Budhaditya Yoga

ज्योतिष में अलग अलग संगम और गोचर होते हैं जिनका सीधा असर आपके जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र की समझ रखने वाले लोग इस बात को समझते हैं लेकिन इस लेख को लिखने का कारण यह है कि जल्द ही वृश्चिक राशि में दो महत्वपूर्ण ग्रहों का गोचर होने वाला है और उसका सीधा प्रभाव आपके जीवन पर पड़ेगा। इस अनोखे संयोजन को ज्योतिष में बुधादित्य योग/ Budhaditya Yoga कहते हैं।

बुधादित्य योग को शुभ योगों की श्रेणी में रखा जाता है और अलग अलग राशियों को यह योग अलग अलग तरीके से प्रभावित करता है। आम तौर पर इस योग से व्यक्तियों को अनुकूल परिणाम देखने को मिलते हैं। यह व्यक्ति की बौद्धिकता, उसके कार्य क्षेत्र तथा मान सम्मान की वृद्धि में सहायक बनता है। 

बुधादित्य योग कैसे बनता है/How Budhaditya Yoga formed

बुधादित्य योग के निर्माण का कारण बहुत ही सरल है, लेकिन इसे जानने से पहले हमें यह समझना होगा कि बुध ग्रह को बुद्धि एवं वाणी का मुख्य कारक माना जाता है और सूर्य आत्मा होता है जो तेज, उत्साह, नेतृत्व एवं राजसिक सुखों को प्रदान करने वाला ग्रह होता है। ऐसे में जब यह दोनों ग्रह एक साथ होते हैं, तब यह अपनी शुभता व्यक्ति के विकास और उसके जीवन को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होता है। कुंडली में जब एक साथ एक ही राशि में सूर्य और बुध उपस्थित होते हैं तो बुधादित्य योग का निर्माण होता है। अकसर देखा जाता है कि सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर के साथ साथ बुध का भी उसी राशि में गोचर हो जाता है।

बुधादित्य योग है करियर का साथी/ Budhaditya Yoga – a career companion

बुधादित्य योग का आपके करियर पर बहुत शुभ प्रभाव पड़ता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति को पद प्राप्ति होती है और ऑफिस में मान सम्मान की प्राप्ति होती है। इसके साथ साथ वरिष्ठ एवं उच्च अधिकारियों द्वारा आपके काम की प्रशंसा भी होती है। बुध बिजनेस से संबंधित उत्तम ग्रह माना जाता है और सूर्य को सरकारी क्षेत्र से जुड़े कामों के लिए शुभ माना जाता है। ऐसे में इन दोनों का एक साथ एक ही राशि में होना व्यक्ति को कारोबार एवं नौकरी दोनों ही स्थानों पर अनुकूल फलों को देने में सहायक बना सकता है। 

बुधादित्य योग है सरकारी नौकरी एवं पद प्राप्ति का अच्छा मौका

बुधादित्य योग/ Budhaditya Yoga का प्रभाव सरकार से लाभ दिलाने एवं पद प्राप्ति में अत्यंत अनुकूल माना जाता है। सूर्य को ग्रहों के राजा का स्थान प्राप्त है और बुध को राजकुमार का। ऐसी स्थिति में यह दोनों ग्रह ही राजकीय क्षेत्र में सफलता दिलाने वाले होता हैं। जब भी एक ही राशि में दो ग्रह होते हैं तो बेहद ही शुभ परिणाम मिलते हैं। जैसे – सूर्यके साथ बुध का वृश्चिक राशि में गोचर शुभ एवं मजबूत स्थिति में होने पर व्यक्ति को सरकारी क्षेत्र में नौकरी प्राप्त करने का संकेत देता है। सरकार की ओर से कई आर्थिक लाभ एवं अन्य लाभों की प्राप्ति की भी संभव उत्पन्न हो जाती है। इसके कारण व्यक्ति को अपने जीवन में जल्द ही अच्छे पद की प्राप्ति हो सकती है। काम के क्षेत्र में व्यक्तियों को लीडरशिप से जुड़े काम भी मिल सकते हैं। व्यक्ति एक बेहतरीन वक्ता तथा नेतृत्व करने वाला भी बनता है। 

बुधादित्य योग से बन सकता है राजयोग/Raj Yoga

बुधादित्य योग राज योग के समान ही फल देता है। इन दोनों ग्रहों का राजसिक तत्व व्यक्ति के जीवन को अवश्य प्रभावित करता है। यह अपने गुण एवं अपने फलों को प्रदान करता है। इस योग के द्वारा व्यक्ति चाहे निर्धन परिवार में जन्मा हो किंतु इस योग के कारण वह धीरे धीरे भौतिक सुख संपदा को प्राप्त कर सकता है। जीवन में व्यक्ति अपनी कुशलता बौद्धिकता द्वारा राजयोग का सुख प्राप्त करता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति को तेजस्वी गुण, कुशाग्रता, उन्नति, यश एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 

इन राशियों एवं भावों के मेल से बुधादित्य योग बनता है और मजबूत

प्रत्येक योग की भांति बुधादित्य योग का प्रभाव भी कुछ विशेष परिस्थितियों में मजबूत एवं कमजोर स्थिति को दर्शाता है। अगर यह योग बुध और सूर्य की राशि में, इनकी उच्च राशियों या मूल त्रिकोण राशियों में बनता हो तो यह अत्यंत मजबूती पाता है। इसके साथ ही केन्द्र एवं त्रिकोण भावों में इस योग की शुभता में वृद्धि देखने को मिल सकती है। मेष, मिथुन, सिंह, कन्या राशियों में बनने वाला बुधादित्य योग मजबूती को पाता है। यदि यह योग अशुभ भावों या पाप ग्रहों के प्रभाव अथवा नीच राशियों के प्रभाव में बनता है तो उस स्थिति में इस योग के फल कमजोर दिखाई देते हैं। इस प्रकार बुधादित्य योग आपकी कुंडली में किस प्रकार से बना है, यह समझ कर ही आप इस योग के संपूर्ण फलों को अच्छे से समझ सकते हैं और इसकी शुभता का लाभ उठा सकते हैं।

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