हमारे जीवन में बुध ग्रह की भूमिका

बुध ग्रह

 

ज्योतिष शास्त्र में नव ग्रहों में बुध को राजकुमार का स्थान प्राप्त है. बुध ग्रह वाणी, बुद्धि, तर्क वितर्क, संचार का प्रतिनिधित्व करता है. बुध को मनोविनोद, कला, संगीत, कौशल एवं विभिन्न प्रकार की क्षमताओं से जोड़ा जाता है. वैदिक ज्योतिष में एक प्रमुख भूमिका निभाता है. यह हमारी बोलचाल की कुशलता का प्रतिनिधित्व करता है. विचारों को दूसरों तक पहुंचाता है क्योंकि एक विचार अनेक संभावनाओं के लिए उत्तरदायी हो सकता है इसलिए बुध ग्रह का प्रभाव अगर शुभ होगा तो विचार सकारात्मक बदलाव दिखाने में सक्षम होगा. लेकिन, अगर बुध अशुभ होगा तो विचार उथलपुथल अव्यवस्था का कारण भी बन सकता है.

बुध ग्रह का महत्व 

बुध ग्रह की स्थिति पौराणिक ग्रंथों में काफी दिलचस्प है, बुध का स्वरूप, बुध जन्म कथा और विष्णु भगवान के प्रति इनकी अनन्य भक्ति का स्वरूप सभी बातें काफी रोचक और गहन रहस्य को दर्शाती हैं. बुध ग्रह की जन्म कुंडली में स्थिति का प्रभाव जातक के जीवन में उसकी वाणी, बौद्धिकता उसके विचारों के आदान प्रदान पर गंभीरता से पड़ता है.

 

बुध की शुभता एक व्यक्ति को ऊंचाइयों तक ले जाने में एवं प्रसिद्धि प्राप्त करने में अत्यधिक अनुकूल बनती है. यदि हम वाणी का प्रभाव देखें तो पाएंगे की स्वर कोकिला लता जी और महानायक अमिताभ बच्चन की कुंडलियों में बुध का प्रभाव उनकी वाणी को इतना प्रभावी बनाता है जिसके कारण वह सफलता की ऊंचाइयों में शिखर पर उपस्थित होते हैं


बुध की शुभता का प्रभाव बौद्धिकता एवं तर्क पर भी पड़ता है. हमारी सोच तथा हमारे तर्क की स्थिति कितनी अनुकूल होगी ये बातें बुध ग्रह पर निर्भर करती हैं. यदि बुध शुभ हो तो यह कला के क्षेत्र में एवं संचार के क्षेत्र में प्रसिद्धि दिलाने में सक्षम होता है. व्यक्ति लेखन, भाषण, अभिव्यक्ति के मामले में काफी अग्रीण दिखाई देता है. यदि संचार से जुड़े उपकरणों की बात की जाए तो उनमें सफलता का मापदण्ड काफी अधिक बुध पर निर्भर करता है.

बुध कुंडली में कमजोर हो तो क्या होता है

जन्म कुंडली में बुध की शुभता व्यक्ति को विद्वानों में स्थान दिलाती है. इसके विपरीत बुध का कुंडली में कमजोर होना जातक को वाणी दोष, स्मृति में कमी, बौद्धिकता याददाश्त की कमी, कुतर्क की स्थिति, बड़बोलापन, त्वचा से संबंधित विकार अत्यधिक परेशान कर सकते हैं. इसके साथ ही मानसिक तनाव, तंत्रिका संबंधी विकारों का अनुभव कर सकते हैं. बुध ग्रह व्यक्ति के मन, मस्तिष्क, तंत्रिकाओं और वाणी पर अधिकार रखता है, इसलिए अगर बुध खराब है तो ये चीजें सबसे पहले प्रभावित होंगी. एकाग्रता की कमी और चीजों को याद रखना मुश्किल हो सकता है.

 

कमजोर बुध का प्रभाव तर्कहीन बना सकता है. साधारण परिस्थितियां भी जटिल लग सकती हैं. कार्य करने में आलस्य दिखा सकते हैं. लोगों के मध्य अपनी बात खुलकर नहीं बोल पाएंगे. आत्मग्लानि का अनुभव हो सकता है. बुद्धि, ज्ञान, वाणी और धन की हानि झेलनी पड़ सकती है. जीवन में सुख एवं आनंद की कमी बनी रह सकती है.

बुध दशा का प्रभाव

बुध की महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर दशा इत्यादि फल का परिणाम, जन्म कुंडली में बुध की स्थिति पर अधिक निर्भर करता है. सामान्य रुप से बुध की महादशा में व्यक्ति अधिक वाचाल दिखाई दे सकता है, सामान्य तौर पर, बुध को एक शुभ ग्रह माना जाता है, साथ ही बुध जिस ग्रह या राशि में स्थित होता है उसके सहचर्य का भी बुध पर गहरा प्रभाव पड़ता है. बुध की महादशा कुल 17 वर्ष की होती है. मुख्य रूप से महादशा अवधि बुद्धि, विद्या, लेखन, वाणी और शिक्षा इत्यादि का प्रतिनिधित्व करती है. बुध महादशा के दौरान ज्ञान, रचनात्मक जिज्ञासा में वृद्धि देखने को मिलती है.

  

इस अवधि के दौरान जातक अपनी शिक्षा को लेकर अधिक विचारशील रह सकता है. दिमाग में बहुत सारे विचारों का जन्म होगा. करियर या व्यवसाय में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं. बुध महादशा के दौरान ज्ञान, मेलजोल, नई चीजों से जुड़ने, अभिरुचि से जुड़े काम करने की इच्छा अधिक दिखाई देती है. इस समय अनेक अवसर प्राप्त हो सकते हैं तथा विकल्पों में चुनाव का मौका भी मिल सकता है. इस समय के दौरान व्यक्ति एक से अधिक चीजों में व्यस्त रह सकता है. एक साथ कई अन्य काम करने की इच्छा रह सकती है. कुछ नया करने और अपने शौक को पूरा करने का मन रहता है


बुध महादशा में, व्यक्ति अपने कौशल को निखारने, नई चीजें सीखने, मौज मस्ती से जुड़ने की इच्छा रख सकता है. बुध की महादशा में जीवन को एक उत्साही बच्चे की भांति जीने की इच्छा होती है. मेहनत से अधिक अपनी बुद्धि के बल पर काम करना चाहेंगे. अच्छी सुविधाओं के प्रति लालसा रह सकती है. चीजों को लेकर अधिक तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच रख सकते हैं. बुध की महादशा में आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ाव हो सकता है, गुरु जन एवं विद्वान व्यक्तियों के साथ मेलजोल होने की संभावना रहती है. जीवन में धन, यश, सुख सम्मान की कामना बनी रहती है.

बुध ग्रह को मजबूत कैसे करें

बुध को मजबूत करने के लिए सबसे पहले यह जानने की आवश्यकता होती है कि बुध आपकी जन्म कुंडली में किस स्थिति में बैठा हुआ है. बुध कुंडली में किन भावों का स्वामी है, वक्री है, अस्त है, पाप ग्रह के साथ, पाप ग्रह की दृष्टि में है या वर्ग कुंडलियों में बुध की स्थिति इत्यादि बातें बुध ग्रह के शुभ एवं अशुभ फलों को बेहतर ढंग से समझने तथा उसके उपाय हेतु आवश्यक होती है. बुध को शुभता प्रदान करने हेतु श्री विष्णु पूजन, बुध मंत्र जाप  करना उत्तम उपाय होता है किंतु कुंडली का उचित रुप से विश्लेषण करने के पश्चात ही बुध ग्रह की दुर्बलता उसकी कमजोरी को दूर करके अच्छे फलों को प्राप्त किया जा सकता है.

 

बुध के शुभ फलों को पाने के लिए योग्य ज्योतिषी द्वारा कुंडली विश्लेषण करने के पश्चात उपायों को करने से अनुकूल फलों को पाने में सफल हो सकते हैं. बुध के शुभ फल व्यक्ति को लोगों के मध्य आकर्षण और चुम्बकीय व्यक्तित्व प्रदान करते हैं.

 

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