कुंडली के ग्यारहवें भाव में चन्द्रमा व केतु की युति क्या प्रभाव देती है

केतु और चन्द्र

कुंडली का ग्यारहवां भाव एक बहुत ही महत्वपूर्ण भाव है क्योंकि इस भाव से आमदनी, इनकम व जीवन में मिलने वाले लाभ का विचार किया जाता है. किसी भी व्यक्ति का जीवन सही और सुचारू ढंग से तभी चल सकता है जब उस व्यक्ति के पास आय के पर्याप्त स्रोत हों. यदि आमदनी अच्छी नहीं होगी तो व्यक्ति का जीवन संघर्षमय हो सकता है. कुंडली के ग्यारहवें भाव से लाभ, आय, बड़े भाई-बहन, मित्र या दोस्त, आमदनी के स्रोत, आर्थिक स्थिति, धन कमाने के साधन, धन संचय करने की क्षमता, पारिवारिक व्यवसाय, बड़े भाई-बहनों की संख्या व उनसे मिलने वाला सुख-दुःख आदि का विचार किया जाता है.

 

दसवां भाव/Dasva Bhav कर्म या कार्यक्षेत्र का है तो ग्यारहवां भाव उस कर्म या कार्यक्षेत्र से मिलने वाले लाभ की जानकारी देता है. चौथे से आठवां भाव/Aathva bhav होने के कारण ग्यारहवां भाव माता की आयु व मृत्यु के स्वरुप की जानकारी भी देता है. पांचवें से सातवां भाव/Satva Bhav होने के कारण इस भाव से संतान के जीवनसाथी, दीर्घकालिक संबंध व बिजनेस पार्टनर का विचार भी किया जाता है. नैतिक या अनैतिक कार्यों से कमाए जाने वाले धन व आमदनी के स्तर का विचार भी इसी भाव से किया जाता है. इस भाव का कारक ग्रह गुरु है. इस भाव की गणना त्रिषडाय(3, 6, 11 भाव) व उपचय भावों में होती है. इस भाव में लगभग सभी ग्रहों को शुभ माना जाता है.

 

इस भाव के स्वामी को लाभेश या एकादशेश कहते हैं. इस भाव पर जैसे ग्रहों का प्रभाव हो उन्ही ग्रहों के कारकत्वों के अनुसार व्यक्ति को आमदनी की प्राप्ति होती है. वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रह है. चन्द्रमा एक चंचल प्रकृति का ग्रह है. ये स्त्री व जल तत्व प्रधान है. यह सबसे अधिक तीव्र गति से चलने वाला ग्रह है. यह शरीर में कफ और जल तत्व से जुड़े रोग उत्पन्न करता है. अगर जन्म कुंडली में चंद्रमा/Janam Kundli me Chandrama बली स्थिति में हो तो व्यक्ति संतुलित मन व विचारधारा वाला होता है और उसे जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है. ऐसा व्यक्ति हमेशा प्रसन्न रहता है.

 

चंद्रमा पुरुष की बाईं आंख व स्त्री की दांयी आंख, रक्त, जल, मन, माता, स्तन, छाती, फेफड़े, गर्भाश्य, अण्डाशय, मूत्राशय आदि का कारक है. चंद्र कुंडली/Kundli में निर्बली हो तो व्यक्ति को मानसिक रोग, रक्त विकार, छाती व फेफड़े से जुड़े रोग, गर्भाशय के रोग व नेत्र रोग आदि होते हैं. अगर कुंडली में चंद्रमा निर्बली हो या अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो तो व्यक्ति भयभीत, अस्थिर, चंचल, होता है. बली चंद्रमा जल, तरल व सफ़ेद पदार्थों के कारोबार से लाभ देता है. चन्द्रमा एक धनदायक ग्रह भी है. केतु अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गूढ़ व गुप्त विद्याएं, आयुर्वेद, चिकित्सा, तंत्र-मंत्र, योग, ज्योतिष, हीलिंग साइंस आदि का कारक ग्रह है. केतु उग्र स्वभाव वाला व पित्त प्रकृति वाला ग्रह है. केतु व्यक्ति को सांसारिक विषयों की ओर न मोड़कर आध्यात्मिक क्षेत्रों में रूचि देता है. केतु यदि अनुकूल हो तो व्यक्ति अध्यात्म, आयुर्वेद, चिकित्सा, हीलिंग से जुड़े क्षेत्र, गूढ़ विज्ञान व रिसर्च संबंधी क्षेत्र आदि के माध्यम से लाभ प्राप्त करता है.

 

अब ग्यारहवें भाव में चन्द्र व केतु की युति की बात करते हैं. चन्द्रमा मन, भावनाएं व माता का कारक ग्रह है और केतु का संबंध वैराग्य, अध्यात्म, सन्यास, मोक्ष आदि से है इसलिए चंद्रमा व केतु की युति/Conjunction of moon and ketu व्यक्ति में आध्यात्मिकता का संचार करती है. ऐसे व्यक्ति के मन में सांसारिक विषयों के प्रति विरक्ति होने लगती है. चंद्रमा बेहद कोमल, चंचल, संवेदनशील व नाजुक प्रकृति का ग्रह है और केतु उग्र, क्रूर, पित्त प्रकृति वाला व अग्नि तत्व प्रधान ग्रह है. केतु के अग्नि तत्व व चन्द्रमा के जल तत्व में शत्रुता है क्योंकि जल अग्नि को बुझा देता है और अग्नि जल को भाप बनाकर उड़ा देती है इसलिए चंद्र केतु की ग्यारहवें भाव में/Gyarahve bhav me Ketu युति सांसारिक विषयों के लिए अच्छी नहीं है.

 

ऐसा व्यक्ति मातृ सुख से वंचित हो सकता है. उसकी माता की तबीयत ख़राब रह सकती है अक्सर ऐसे व्यक्ति की माता को जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती है. ऐसे व्यक्ति के मन में उदासी बनी रहती है. उसकी मानसिक शांति भंग रह सकती है. उसको मनोरोग या मानसिक विकार जैसे डिप्रेशन, फोबिया आदि हो सकते हैं. हालांकि ऐसे व्यक्ति को आध्यात्मिक विषयों से अच्छा लाभ मिल सकता है. ऐसा व्यक्ति आध्यात्मिक विचारधारा का हो सकता है या उसके मन में आध्यात्मिक विचार अधिक आते हैं. ग्यारहवें भाव में चन्द्र केतु की युति बताती है कि व्यक्ति को आध्यात्मिक क्षेत्रों से अच्छी आमदनी हो सकती है.

 

चंद्रमा यात्रा का, केतु आध्यात्मिकता का और ग्यारहवां भाव/Gyarahve bhav लाभ व इच्छाओं की पूर्ति का कारक होने के कारण ऐसे व्यक्ति को आध्यात्मिक यात्राओं से लाभ मिलता है या दूसरे शब्दों में ऐसा भी कह सकते हैं कि आध्यात्मिक यात्राओं के माध्यम से उसकी इच्छाओं की पूर्ति हो सकती है. चन्द्रमा व केतु की युति ये भी बताती है कि व्यक्ति की माता उच्च कोटि की आध्यात्मिक स्त्री हो सकती है.

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