गंगा दशहरा 2020: गंगा जल का महाउपाय जो दिलाएगा दु:खों से मुक्ति और करेगा कल्याण

गंगा दशहरा 2020

‘गम्यते प्राप्यते ज्ञाप्यते मोक्षार्थिभिया सा गंगा।’ अर्थात् जिससे मोक्ष का ज्ञान और उसकी प्राप्ति हो, उसे गंगा कहा गया है। मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था। इस पावन तिथि को हम गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के नाम से जानते हैं।

सनातन काल से गंगा में बह रही अमृत धारा हमारी आस्था का प्रमुख केन्द्र है। जहां हर 12 साल में पावन कुंभ मेला लगता है। जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा गंगा से नाता बना रहता है। मां गंगा सभी मनोकामनाओं को पूरा भी करती हैं और तमाम तरह के दु:खों से मुक्ति भी दिलाती हैं। हमारे यहां गंगा में डुबकी लगाने का अर्थ ही कार्य पूरे होने से है। कहावत भी है कि फलां व्यक्ति ने फलां कार्य करके गंगा स्नान कर लिया। यही कारण है कि गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के दिन प्रयागराज, हरिद्वार और वाराणसी जैसे गंगा तटों पर बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पवित्र डुबकी लगाने के लिए पहुंचते रहे हैं।

ऐसे हुआ था मां गंगा का अवतरण

मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का संबंध भी हमारे पुरखों की मुक्ति और मानव मात्र के कल्याण से जुड़ा हुआ है। अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने के लिए राजा भागीरथ ने उन्हें पृथ्वी पर लाने के लिए कठिन तपस्या की थी। जिसके बाद मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल से निकलकर पृथ्वी की ओर बड़े वेग के साथ चल पड़ीं। उनके शक्तिशाली प्रवाह को नियंत्रित करना काफी मुश्किल था। तब राजा भागीरथ ने भगवान शिव से उनके वेग को कम करने के लिए प्रार्थना की। जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें जटाओं में बांध लिया। स्वर्ग से चली गंगा भगवान शिव का स्पर्श पाकर और भी पवित्र हो गईं।

कोरोना काल में कैसे करें गंगा पूजन

आज इस कोरोना काल में सभी के लिए गंगा तट पर पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए इस पावन पर्व से जुड़े धार्मिक कार्य कैसे किए जाएं यह एक सवाल प्रत्येक व्यक्ति के मन में हैं। मां गंगा के लिए कहा जाता है गंगे तव दर्शनात् मुक्ति। यानी उनके दर्शन मात्र से ही प्राणी मात्र का मोक्ष हो जाता है। ऐसी जीवनदायिनी, पुण्यदायिनी गंगा का महापर्व मनाने के लिए हम अपने घर में नहाते समय बाल्टी में रखे जल में थोड़ा सा गंगा जल (GANGA JAL) मिला लें। अब इस पावन गंगा जल (GANGA JAL) से स्नान करें और उसके पश्चात् पूरे घर में गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। ऐसा करने से नकारात्मक उर्जा खत्म होगी और सकारात्मक उर्जा का संचार होगा। मां गंगा का विधि—विधान से पूजन करें। ऐसा करने से आपको गंगा स्नान का पूरा फल प्राप्त होगा।

गंगा दशहरा के दिन शिव पूजन का महत्व:

गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के दिन गंगाजल का पवित्र स्पर्श गंगा मानव को सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है। इस दिन किया गया गंगा स्नान कई यज्ञ के बराबर फल देने वाला होता है। चूंकि मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकलकर ​पृथ्वी पर पहुंचती हैं, ऐसे में सोमवार के दिन गंगा पूजन के साथ शिव पूजन का सुखद संयोग बन रहा है। गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान, गंगा पूजन के साथ—साथ भगवान शिव को बिल्वपत्र, पुष्प और और गंगा का जल चढ़ाएं।

गंगा दशहरा पर दान से होगा कल्याण

गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के दिन सिर्फ गंगा पूजन से ही नहीं बल्कि दान-दक्षिणा का भी अत्यंत महत्व है। इस पावन पर्व पर किया दान अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति दिलाता है। गंगा दशहरा के दिन सत्तू, घड़ा और पंखा दान करना शुभ होता है।

गंगा दशहरा में दस की संख्या का महत्व

मां गंगा की साधना—आराधना में 10 की संख्या का अत्यधिक महत्व है। ज्योतिष के अनुसार मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण भी दस महायोग में हुआ था। कुछ ऐसे ही गंगा स्नान में 10 डुबकी, गंगा जी का 10 उपचारों से पूजन और 10 तरह का दान अत्यंत ही फलदायक है। हिमालय पर्वत के गोमुख से निकलकर गंगागार तक का सफर तय करने वाली गंगा को 108 नामों से जाना जाता है। जिनमें से मां गंगा के 10 नाम काफी प्रचलित हैं —

  • जाह्नवी
  • त्रिपथगा
  • मंदाकिनी
  • भागीरथी
  • देवनदी
  • उत्तरवाहिनी
  • दुर्गा
  • शिवाया
  • मुख्या
  • सदानीरा

गंगाजल का महाउपाय

गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के दिन से आप अपने घर के प्रत्येक कोने में गंगा जल (GANGA JAL) छिड़कना प्रारंभ करें। इस पवित्र जल से आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी  और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। इस उपाय से घर से जुड़ा वास्तुदोष भी दूर होगा। यदि तमाम कोशिशों के बावजूद आपके पास धन की कमी बनी रहती है और आपका कर्ज का मर्ज दूर नहीं हो रहा है तो आप गंगा दशहरा के दिन पवित्र गंगाजल को एक पीतल के बर्तन में भरकर घर की उत्तर पूर्व दिशा में रख दें। ध्यान रहे इस गंगा जल (GANGA JAL) को ऐसी जगह रखें जहां इसकी पवित्रता बनी रहे। यह उपाय न सिर्फ आपको कर्ज से मुक्त करेगा, बल्कि आपका घर धन—धान्य से भरा रहेगा।

नोट: मां गंगा का संबंध हमारी आस्था से है। ऐसे में गंगाजल से जुड़े उपायों और पूजन को विधि—विधान से करने के लिए अपने पूज्य गुरु या संबंधित धर्म एवं ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

और पढ़ें—–

Leave a Reply