Home Forums ग्रहों से सम्बंधित – प्रश्न और उत्तर सूर्य से सम्बंधित – प्रश्न और उत्तर सूर्य के प्रथम भाव में उपस्थित होने पर क्या होगा जातक के जीवन पर इसका प्रभाव ?

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    प्रथम भाव में सूर्य की उपस्थिति से मानव जीवन के सभी पहलुओं पर प्रभाव पड़ता है चाहे वह  प्रभाव भौतिक हों या न हों |

    जातक की मानसिक प्रवृति पर भी सूर्य का प्रभाव पड़ता है | आइये जाने सूर्य के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं के बारे में :-

    प्रथम भाव में सूर्य की उपस्थिति जातक को बहुत गुस्से से युक्त , कठोर व्यक्तित्व , बेईमान लोगों के साथ  समायोज्य, कभी-कभी सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं से परेशानी / क्रोध / बदला का परिणाम देती है |

    यदि इन जातको पर सरकारी कार्यालयों या सरकारी स्वामित्व वाले संगठनों या स्थानीय निकायों, नगर पालिकाओं आदि से कोई बकाया है, तो भुगतान में देरी हो जाती है और कभी-कभी लालची या ईर्ष्यापूर्ण अधिकारियों द्वारा आरोपी बनाये जा सकते हैं।।

    इनके द्वारा आपूर्ति किये सामान या सेवाओं को सरकारी कर्मचारी अपने निजी स्वार्थों के कारण अस्वीकार कर सकते हैं |

    ऐसे जातक यदि सरकारी या अर्धसरकारी नौकरी करते हैं तो प्राय: इनका स्थान्तरण असुविधाजनक स्थान पर होता रहता है |  इन जातकों के लिए अपने कार्यालय में अपनी निजी और व्यक्तिगत जीवन के बारे में जाँच पड़ताल का सामना करना पड़ सकता है चांहे वह इसके लिए जिम्मेदार हों या नहीं |

    प्रथम भाव में सूर्य है एक द्विधारी तलवार

    • जातक की कुंडली में उपस्थित प्रथम भाव में सूर्य एक दो धार वाली तलवार के समान है | यह जातक को ताकतवर भी बनता है और उत्पीड़न व यातना के स्त्रोत भी प्रदान कर सकता है | यह व्यक्ति   शायद ही कभी किसी  कार्य में अक्षम रहते हों |
    • यदि इन जातकों को सक्रिय राजनीति में प्रवेश मिल जाता है | तब इन जातकों के पास छोटी से छोटी भूमिका के बाद भी अपनी प्रतिष्ठा और शक्ति को बढ़ाने का अच्छा मौका होता है |
    • कभी-कभी ये जातक राजनीतिक क्षेत्र में नहीं जाते हैं | परन्तु वे राजनीति और शासन में उच्च प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों के साथ निकट संपर्क में रहते हैं। यदि सूर्य प्रथम भाव में अपनी स्वयं की राशि ( सिंह) में या कन्या,मीन या मेष के साथ हो तो यह जातक एक बुरे व्यक्तित्व के रूप में उभरते हैं | फिर चाहें वास्तव में वह बुरे हों या नहीं |
    • यह जातक कमजोर दृष्टि , त्वचा की बीमारी , सिर दर्द आदि के लिए संवेदनशील होते हैं | इसके आलावा इनके स्वास्थ्य पर सूर्य का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता |
    • इसका मतलब यह नहीं है कि ये जातक स्वयंरोजगार, व्यवसाय या किसी निजी उद्यम के क्षेत्र में नहीं जाते हैं | वे क्षेत्र भी उनके लिए खुले होते हैं | परन्तु कोई उल्लेखनीय सफलता,इन जातकों की कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य की साथ साथ अन्य ग्रहों के समर्थन पर निर्भर करती हैं | इसमें कोई संदेह नहीं है व्यवसाय या स्व-रोज़गार में कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी के साथ  एक मिसाल  बनाते हैं |
    • लेकिन प्रतियोगी और ईर्ष्यावान व्यक्ति अक्सर इन जातकों के मार्ग में बाधा बनने की कोशिश करते हैं | ताकि उनके अधीनस्थ, कर्मचारी, और शिष्य भी उन्हें आर्थिक रूप से या उनकी भावनाओं को नुकसान पहुंचा सकें |
    • अक्सर ये जातक बाहर से बहुत महत्वाकांक्षी दिखाई देते हैं | परन्तु आंतरिक रूप से ये जोखिमों से परहेज करने वाले कुछ हद तक डरपोक भी होते हैं |  यदि  सूर्य प्रथम भाव में अकेला है तो ऐसे जातक ईमानदार, सीधे और स्पष्टवादी होते हैं | परन्तु अपनी स्पष्टवादिता से दूसरों को नुक्सान पहुंचाने वाले नहीं | प्रथम भाव में सूर्य का एक प्रभाव ये भी है कि ऐसे व्यक्तियों की सीमित संताने होती हैं | परन्तु विवाह के अलावा बाहर संतान हो सकती हैं (पुरुषों पर अधिक लागू!) |
    • ये जातक घरेलू नौकर , अन्य कर्मचारियों, अधीनस्थों और पुरुषों के प्रति दयालु और समायोजित हैं, लेकिन सीमाओं के अंदर | यह कभी भी अपने जीवनसाथी  ( पति / पत्नी ) लंबी अनुपस्थिति के दौरान,कर्मचारी या घरेलू नौकर के प्रति  अतिरिक्त सम्मोहित हों सकते हैं  |

    ऐसे जातक अपनी व्यक्तित्व और शारीरिक सुंदरता से दूसरों को आकर्षित करने वाले होते हैं |

    अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए देखिये यह वीडियो-

    https://www.youtube.com/watch?v=SD6KI3wxDv8&t=22s

     

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