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    नवांश व नवांश चक्र  –  एक राशि तीस अंश की होती है जबकि एक नवांश ३ अंश २० कला  का होता है | अत: एक राशि नौ भागों में विभाजित की जाती है जिसे नवांश कहते हैं अर्थात नौवां अंश और प्रत्येक अंश ३ अंश २० कला का होता है |  यदि जातक का जन्म वर्गोत्तम लग्न में हुआ हो , अर्थात जन्म लग्न में प्रथम भाव की राशि  तथा नवांश चक्र में प्रथम भाव की राशि समान हो ,तो  प्रथम भाव से संबंधित विषयों के फलों में वृद्धि होती है |

    शुभं वर्गोत्तमे  जन्म वशिस्ठाने सद् ग्रह |

    अशुन्येषु केन्द्रेषु कारकारव्यग्रहेषु च |

    जिस प्रकार बारह राशियाँ होती हैं बारह राशियों में से प्रत्येक को नौ भागों में विभाजित किया जाता है | अत: बारहों राशियों १२*९=१०८ भागों में , ८ नवंशों में विभाजित हैं इसीलिए माला में १०८ मनके होते हैं |

    बारह राशियों की तरह २७ नक्षत्र भी होते हैं | प्रत्येक नक्षत्र को चार भागों में विभाजित किया जाता है | उन चार भागों को पद या चरण कहते हैं | एक नक्षत्र का मान १३ अंश २० कला होता है  | एक नक्षत्र का एक पद ३ अंश २० कला का होता है | एक नवांश भी ३ अंश २० कला का होता है | अत: नक्षत्र का एक पद और एक नवांश एक-दूसरे के बराबर होते हैं | यही नवांश चक्र है |

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    https://www.youtube.com/watch?v=cVophEqrxlU&t=5s

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    https://www.vinaybajrangi.com

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