क्यों होता है लोगों का अंत असामयिक?

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    जो पापाचरण करने वाला होता है, जो लोभी, चोर, देव और ब्राह्मण का निन्दक,  परस्त्रीगामी होता है ,  उनका अन्त असामयिक होता है। इससे स्पष्ट है कि किसी व्यक्ति की जीवन-अवधि उसके कुकर्मों के फलस्वरूप क्षीण हो सकती है।

    “ये पापलुब्धाश्चौराश्च देवब्राह्मणनिन्दकाः।

    परदाररता ये च ह्यकाले मरणं भवेत्।।”

    अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए देखिये यह वीडियो-

     https://www.youtube.com/watch?v=U88dWej7-so

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    https://www.vinaybajrangi.com/

    इससे संबन्धित प्रशनो के उत्तर जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करिए-

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