क्यों होता है दशहरे/ Dusherra पर अबूझ मुहूर्त/Muhurt

दशहरे पर अबूझ मुहूर्त

दशहरा/Dusherra का समय मुहूर्त शास्त्र में अबूझ मुहूर्त है। ग्रंथों के अनुसार इस दिन किसी विशेष मुहूर्त को जानने की आवश्यकता नही होती है क्योंकि यह पूरा दिन ही अपने आप में शुभता की परकाष्ठा को लिए हुए होता है। दशमी तिथि का संयोग इस समय को पूर्णता प्रदान करता है। ज्योतिष शास्त्र में दशमी तिथि को पूर्णा तिथि के रुप में भी जाना गया है अर्थात इस समय पर किए जाने वाले कार्य पूर्ण होते हैं। किसी भी कार्य में व्यवधान नहीं पड़ता तथा व्यक्ति के मनोरथ सिद्ध करने के लिए यह तिथि अत्यंत ही शुभ दायक होती है।

दशहरा संपूर्ण भारत में उत्साह व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व को विजयादशमी/ Vijyadashmi, अपराजिता पर्व, आयुध पूजा, सीमोल्लंघन इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इसके प्रत्येक नाम का अपना एक अलग अर्थ है। दशहरा अर्थात दस सिर वाले रावण की पराजय का उत्सव, दस प्रकार के पापों का शमन, विजय की प्राप्ति का समय विजयदशमी, शक्ति संपन्न होने का समय आयुध की पूजा का समय इत्यादि नाम अपने आप में इस पर्व के अलग-अलग अर्थ को प्रकट करते हैं, लेकिन इसका एक स्वर जो इन सभी में मुख्य रुप से उभरता है वो उस मुक्ति और स्वतंत्रता को दर्शाता है जिसमें व्यक्ति को सभी प्रकार के भय से मुक्त होता है और उसे जीवन जीने की एक नयी दिशा प्राप्त होती है।

यह वो समय होता है जब निर्बलता समाप्त होती है और सबलता का प्रादुर्भाव होता है। यह एक निरंतर किया जाने वाला वो संघर्ष है जो अंत में शुभता का आशीष प्रदान करता है।

दशहरा अबूझ मुहूर्त योग

दशहरा एक अबूझ मुहूर्त/Muhurt समय होता है इसके साथ यदि इस दिन शनिवार या बृहस्पतिवार का समय भी हो तो यह कुछ अन्य विशिष्ट योग भी निर्मित करता है। अगर दशहरे के दिन बृहस्पतिवार हो तो यह “सिद्धि” योग निर्मित करता है। इसी प्रकार दशहरा यदि शनिवार पड़ता हो तो यह “अमृत” योग बनाता है।

दशहरा अबूझ मुहूर्त में किए जाने वाले कार्य

दशहरे  का समय एक अत्यंत शुभ समय माना गया है, इस समय कई प्रकार के शुभ-मांगलिक कार्यों को करना उत्तम फल प्रदान करता है। दशमी तिथि मनोवांछित फल प्रदान करने में सहायक होती है। इस समय पर विवाह से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं। नई वस्तुओं की खरीदारी इस समय पर करना अत्यंत शुभ होता है। वाहन, वस्त्र आभूषण इत्यादि वस्तुओं को इस समय खरीदना अच्छा माना गया है।

इस दिन विशेष रुप से शस्त्रों की पूजा भी उत्तम होती है। शस्त्र का अर्थ सिर्फ हथियारों से नहीं है इसका अर्थ उन सभी वस्तुओं से हैं जो हम अपने जीवन में उत्तम स्थिति को प्राप्त करने हेतु उपयोग में लाते हैं, इसे इस उदाहरण से भी समझ सकते हैं कि विद्यार्थी का शस्त्र उसकी लेखनी होती है जिसके द्वारा वह समस्त ज्ञान अर्जित करने एवं अपने ज्ञान को दूसरों तक पहुंचाने के योग्य बनता है। इसी प्रकार व्यक्ति के जीवन में हर वह वस्तु जो उसके आत्म ज्ञान को विकसित करने एवं जीवन को सुखमय बनाने हेतु आवश्यक है उन सभी का अभिनंदन इस दिन करना अत्यंत ही उत्तम माना जाता है।

दशहरा पर्व के समय पर ग्रन्थ का निर्माण एवं उसका लोकार्पण उत्तम होता है, किसी प्रकार की शपथ ग्रहण करना भी उत्तम माना गया है। किसी नए कार्य का आरंभ भी उत्तम होता है। इसी प्रकार उपासना से जुड़े कार्य भी शुभ फलदायी बनते हैं।

विजय नामक योग तारा का उदय

ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार व ज्योतिर्निबन्ध में एक स्थान पर उल्लेख मिलता है कि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन विजय नामक तारे का उदय होता है और यह समय विजय प्राप्ति हेतु अत्यंत ही शुभदायक होता है। इसके अतिरिक्त एक अन्य कथा के अनुसार कहा जाता है की आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन संध्या समय पर विजय योग का निर्माण होता है जो विजय प्राप्ति का आशीर्वाद देता है। इसी प्रकार कुछ अन्य मान्यताएं इसे कई अन्य रूपों से दर्शाती हैं जो इस दिन की महत्वता के लिए अत्यंत ही रोचक तथ्य बनता है और इस कारण ये समय अबूझ मुहूर्त भी होता है।

दशहरा का विश्व से संबंध

दशहरा पर्व जहां श्री राम की रावण पर विजय का पर्व है। दशहरा के विषय में केवल भारत तक ही इसकी हम इस देश से बाहर निकल कर देखते हैं तो रामायण का स्वरूप अलग अलग रंग में दिखाई देता है और इसकी विशिष्ट छाप भी कई देशों में सुनाई देती है। नेपाल, लाओस,  मलेशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, भूटान, श्रीलंका, बाली, जावा, सुमात्रा इत्यादि देशों की लोक-संस्कृति व ग्रंथों में आज भी राम के स्वरूप को देखा जा सकता है, चाहे कथा में कई भेद छुपे हों लेकिन कुछ ऐसी बातें मौजूद हैं जो इस बात की पुष्टि अवश्य करती हैं की राम का अस्तित्व सदैव मौजूद रहा है।

भारत में तो राम एक विशिष्ट देव हैं जो जन मानस के हृदय में निवास करते हैं। राम एक व्यक्ति का एक धर्म का स्वरूप नहीं हैं अपितु वह संपूर्ण जगत के जन्म मानस का स्वरुप हैं। दशहरा पर्व के बारे में विश्व में बिखरे पुरातात्विक अवशेषों, भाषा ग्रंथों, शिलालेखों, भित्तिचित्र, रामसेतु, इत्यादि से पुष्टि पाता है।

दशहरे से जुड़े अनेक संस्कार

दशहरा के दिन कई प्रकार के रीति रिवाज किए जाते रहें हैं ग्रामीण संस्कृति से जुड़ा भारत एवं अलग–अलग क्षेत्रों में लोग अपने अपने अनुसार इन संस्कारों को करते हैं। यह एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण समय भी होता है इसलिए इस दिन कई पूजा पाठ, अनुष्ठान, यज्ञ इत्यादि भी किए जाते हैं।  इस दिन कृषि से जुड़े लोग कृषि महोत्सव के रुप में मनाते हैं, क्षत्रिय समुदाय के लोग क्षात्र उत्सव नाम से इसे मनाते हैं। कुछ इसे शमी पूजन और शमी के पत्तों को स्वर्ण का स्वरूप माना जाता है और यह सभी में वितरित किये जाते और इस तरह से दिन को मनाते हैं। सीमोल्लंघन करते हुए विजय को प्राप्त करने की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है। अपराजिता पूजन और उसमें आयुध पूजा अर्थात शस्त्रों का पूजन भी किया जाता है।

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