दिवाली 2021 – दिवाली के लिए शुभ मुहूर्त?

Diwali

दिवाली(दीपावली) का त्यौहार संपूर्ण भारत वर्ष में जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दीपावली/Diwali 2021 को मुख्य रूप से धन धान्य और भौतिक सुखों को प्रदान करने वाली देवी लक्ष्मी जी की पूजा-अनुष्ठान से जुड़ा हुआ है। इस उत्सव की तैयारियां कई दिनों पूर्व ही आरंभ हो जाती हैं, दीपावली की खरीदारी से जुड़े कार्य, घर की साफ सफाई तथा अनुष्ठान इत्यादि से संबंधित कामों की एक लम्बी लिस्ट तैयार होती है। इस शुभ दिन के आने के साथ ही घर-कार्यालयों इत्यादि सभी स्थानों पर लक्ष्मी पूजन/Lakshmi pujan और अन्य कार्य आरंभ होते हैं, तथा विशेष शुभ मुहूर्त समय के अनुसार पूजा की जाती है। मुख्य रूप से दीपावली पूजन/Deepawali Pujan के लिए हर व्यक्ति शुभ मुहूर्त पर पूजा करता है। यदि कोई भी इस शुभ दिन के लाभ को प्राप्त करना चाहता है तो उसे इस दिन शुभ मुहूर्त पर ही पूजन करना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है तो इसका लाभ अवश्य मिलता है।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन मुहूर्त

कार्तिक मास की अमावस्या/Amavasya of kartik maas को दीपावली पर्व के रूप में मनाया जाता है। ब्रह्म पुराण के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या में अर्द्धरात्रि के समय देवी लक्ष्मी पृथ्वी लोक में विचरण करती हैं। अत: यह समय अत्यंत ही शुभ माना जाता है।

वर्ष 2021 में 4 नवम्बर पर प्रदोष काल से अर्द्धरात्रि पश्चात 23:45 तक अमावस्या रहेगी। इस दिन आयुष्मान योग, स्वाति नक्षत्र योग, कालीन अपराह्न, सायाह्न, प्रदोष काल, निशीथ काल और महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या युक्त होने के कारण शुभ फल दायक तथा पुण्य-प्राप्ति को दर्शाता है। 

प्रदोष काल मुहूर्त 

4 नवंबर 2021 के दिन 17:34 से 20:20 तक का समय प्रदोष काल रहेगा। विशेष तौर पर इस समय में अन्य स्थानों में कुछ अंतर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि सभी स्थानों के सूर्योदय के समय के चलते ऐसा होना स्वाभाविक है। प्रदोष काल समय को दिवाली पूजा के लिए अच्छा समय माना जाता है तथा इसे शुभ मुहूर्त के रूप में भी उपयोग किया जाता रहा है। 

प्रदोष काल समय के दौरान 18:11 से 20:05 तक का समय वृषभ लग्न का होगा। वृषभ लग्न/Vrishabh Lagna को स्थिर लग्न की श्रेणी में रखा जाता है। यदि प्रदोष काल के समय स्थिर लग्न हो तो यह और भी अच्छी स्थिति मानी जाती है। इस दिन प्रदोष काल समय के दौरान वृषभ लग्न के साथ स्वाति नक्षत्र/Swati Nakshatra होगा और चंद्रमा  तुला राशि में स्थित होगा। सूर्यास्त से पूर्व अमृत चौघड़िया 17:32 से 19:12 तक होगी तथा उसके पश्चात चर चौघड़िया 19:12 से 20:52 तक होगी। इसलिए यह समय श्री गणेश पूजन, कुबेर पूजन, बही खाता पूजन करने के लिए उपयुक्त होगा। इस समय पर पूजा-अनुष्ठान का आरंभ किया जा सकता है।   

निशीथ काल क्या है?

4 नवंबर 2021 के दिन निशीथ काल का समय 20:12 से 22:51 तक रहेगा। निशीथ काल में 20:52 तक के समय में चर चौघड़िया होगी, अत: यह अनुकूल व शुभ स्थिति होती है। लेकिन इसके पश्चात रोग व काल नामक चौघड़िया 24:11 तक रहेगी। इस समय में पूजन आरंभ करना उपयुक्त साबित नहीं होगा। 20:52 से पहले महत्वपूर्ण पूजा कार्यों को संपन्न कर लेना चाहिए या फिर मुख्य पूजन को इस समय अवधि से पहले खत्म कर देना चाहिए। उसके पश्चात आप पूजन से जुड़े अन्य कार्य कर सकते हैं।

निशीथ काल/Nishid Kaal के समय और स्थानीय प्रदेश समय के अनुरूप समय पर थोड़ा बहुत अंतर देखने को मिल सकता है। दिवाली पूजन में निशीथ काल पूजन को भी रखा गया है। इस पूजन को भी शुभ मुहूर्त पर ही करना चाहिए। इस समय के दौरान देवी लक्ष्मी जी के स्त्रोत, मंत्र व अन्य पूजा से संबंधित कार्य उत्तम फल प्रदान करने वाले होते हैं। 

क्या है महानिशीथ काल?

महानिशीथ काल का अर्थ है मध्य रात्रि में की जाने वाली पूजा। जो लोग शास्त्रों के अनुसार दिवाली पूजन करना चाहते हैं, उन्हें इस समय अवधि में पूजा करने लाभ प्राप्त हो सकता है। 4 नवंबर 2021 को महानिशीथ काल समय 22:51 से 25:31 तक रहेगा। इस समय में 24:11 तक की अवधि में “काल” नामक चौघड़िया उपस्थित होगी और उसके पश्चात “लाभ” चौघड़िया का आरंभ होगा जो 25:51 तक होगी। यह समय शुभता के लिए उपयुक्त होगा। इस लाभ समय के दौरान धन लक्ष्मी पूजा, काली उपासना, मंत्र जाप, तांत्रिक कार्य साधना, अनुष्ठान, यज्ञ इत्यादि किए जा सकते हैं।

महानिशीथ काल/Mahanishidh kaal में 24:42 से सिंह लग्न आरंभ होगा, अत: यह लग्न भी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान भी विशेष काम्य कर्म या अन्य अभीष्ट कार्य किए जा सकते हैं।

दिवाली चौघड़िया – 4 नवंबर ,2021

लाभ  12:11 से 13:31  

अमृत  13:31 से 14:51  

शुभ 16:11 से 17:32    

अमृत 17:32 से 19:12   

चर 19:12 से 20:52  

लाभ 24:11 से 25:51   

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