त्रिपुष्कर और तीन ग्रहों के संयोग में मनेगा धनतेरस का पर्व

Dhanteras 2021

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। धनतेरस को धनत्रयोदशी, धन्वंतरि जयंती इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। धनतेरस को एक अत्यंत ही शुभ दिन के रुप में मान्यता प्राप्त है। धनतेरस/Dhanteras को शुभ मुहूर्त समय भी माना गया है। इस दिन पर विशेष रुप से कई तरह की खरीदारी की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन नई वस्तुओं की प्राप्ति करना अत्यंत ही शुभ दायक होता है। इस दिन प्राप्त की जाने वाली वस्तु घर परिवार के लिए समृद्धिदायक एवं सुखदायक बनती है। 

धनतेरस के दिन तुला राशि में सूर्य, बुध, मंगल की युति का योग बन रहा है और साथ ही इस समय पर त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। धनतेरस के दिन तुला राशि में सूर्य बुध मंगल की युति का योग बन रहा है और साथ ही इस समय पर त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। धनतेरस पर निवेश करना आने वाले समय के लिए बहुत सकारात्मक होता है। धनतेरस पर बनने वाला त्रिपुष्कर योग ज्योतिष शास्त्र में शुभ योग होता है इस योग के अंतर्गत वस्तु की खरीदारी तीन गुना फल प्रदान करने वाला है। इस दिन तीन ग्रहों का योग व्यापारिक एवं वस्तुओं की खरीदारी हेतु बहुत सहायक बनेगा।  

धनतेरस पूजा मुहूर्त 

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ – 02 नवम्बर, 2021 को 11:31 

त्रयोदशी तिथि समाप्त – 03 नवम्बर, 2021 को 09:02 

धनतेरस पूजा 2 नवम्बर, 2021 को मंगलवार के दिन की जाएगी। धनतेरस की पूजा का समय संध्या 18:16 से 20:11 तक शुभ मुहूर्त काल रहेगा। 

धनतेरस के समय प्रदोष काल समय 17:35 से 20:11 तक होगा। इस समय वृषभ लग्न का समय 18:16 से 20:12 तक रहेगा। धन तेरस के समय स्थिर लग्न के समय पूजा करना उत्तम होता है। प्रदोष काल समय स्थिर लग्न की स्थिति धनतेरस पूजा के लिए उत्तम रहेगी। 

धनतेरस में प्रदोष काल और स्थिर लग्न का महत्व 

धनतेरस के दिन प्रदोष काल समय पर लक्ष्मी पूजा का विशेष विधान रहा है। प्रदोष काल का समय सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और कुल मिलाकर करीब दो घंटे से अधिक रहता है। 

धनतेरस पूजा में प्रदोष काल के समय पर स्थिर लग्न का होना स्थिर लक्ष्मी के घर में वास होने की शुभता में वृद्धि दायक माना जाता है। स्थिर लग्न होने से जीवन में स्थिरता का वास होता है इसलिए इस स्थिर लग्न समय पर की जाने वाली पूजा लम्बे काल तक जीवन को परिवार को प्रभावित करती है। माना जाता है की प्रदोष काल में स्थिर लग्न समय पर यदि धनतेरस की पूजा संपन्न हो तो लक्ष्मी का आगमन स्थिरता को पाता है। इस कारण से धनतेरस के लिए प्रदोष का समय एवं स्थिर लग्न का होना अत्यंत शुभ मुहूर्त समय होता है। 

धन्वन्तरि महोत्सव  

धनतेरस को धन्वन्तरि जी के जन्मोत्सव के रुप में भी मनाया जाता है। धनवंतरी जी को हिंदू धर्म के अनुसार वैद्य का स्थान प्राप्त है और इन्हीं के साथ अमृत का आगमन भी होता है। अमृत मंथन में धन्वंतरी जी अमृत लेकर प्रकट होते हैं जिसके द्वारा देवताओं को अमृत्व की प्राप्ति होती है। पौराणिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन धन्वंतरि पूजन द्वारा रोग दोष समाप्त होते हैं तथा व्यक्ति सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति भी पाता है।   

आयुर्वेद के पितामह धन्वन्तरि जी को ही माना गया है। पुराणों में उल्लेख प्राप्त होता है कि अमूल्य औषधियों एवं आयुर्वेद के ज्ञान में धनवंतरी जी का योगदान रहा है। माना जाता है कि सुश्रुत जो आयुर्वेद के मुख्य आधार रहे हैं  उन्होंने धन्वंतरी द्वारा आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त किया था, इसलिए इस दिन आयुर्वेद के ग्रंथों का पूजन होता है तथा औषधालयों में देव धनवंतरी का पूजन भी किया जाता है। 

धनतेरस पर करते हैं यमाय दीपदान  

इस दिन यमदेव के सम्मुख दीपदान किए जाने की भी परंपरा रही है। यमदेव का पूजन करने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है एवं सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धनतेरस पर संध्या के समय यमदेव की पूजा का विधान होता है इस दिन दक्षिण दिशा की ओर यम देव के निमित्त दीप जलाया जाता है। घरों के मुख्य द्वारा पर भी दीपक जलाने की परंपरा रही है जिससे घर की समस्त नकारात्मकता का नाश होता है और पूर्वजों का आशीष व्यक्ति एवं कुटुंब को प्राप्त होता है। यम दीप दान में आते से बने दीपक अथवा मिट्टी के दीपक का उपयोग करना उत्तम होता है। दीपक में तेल डालकर उसमें पैसे अथवा कौडी को भी डाला जाता है और फिर दीपक जलाया जाता है इस दीपक को संपूर्ण रात्रि के लिए जलाना उत्तम माना गया है। 

धनतेरस पर किन चीजों की खरीदारी होती है शुभ 

धनतेरस के दिन कुछ लोग दीपावली की खरीदारी भी करते हैं इसी दिन लोग सगे संबंधियों को देने हेतु उपहार इत्यादि को खरीदना अधिक पसंद करते हैं इसके अलावा दीपावली के दिन पूजा में उपयोग होने वाले समान की खरीदारी हेतु भी ये समय बहुत अनुकूल होता है। इस दिन चांदी, सोना, पीतल जैसी धातुओं एवं रत्न इत्यादि को खरीदना शुभदायक माना गया है। इसी के साथ सिक्कों, बर्तनों, वस्त्रों व गहनों इत्यादि की खरीदारी भी इस दिन करना अच्छा होता है। इस दिन वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं भूमि की खरीदारी का भी चलन बहुत रहा है। ये दिन एक अत्यंत ही शुभ समय होता है और माना जाता है की इस दिन किए जाने वाला कार्य प्रगति एवं सफलता दिलाने में भी अत्यंत सहायक बनता है। 

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