कब होगी मेरी शादी और क्यों रिश्ते मिलने पर भी नहीं बन पा रही है बात

when will i get married

विवाह का योग कब होगा और शादी होने में लगने वाली देरी न चाहते हुए भी कई बार परेशानी का कारण बन ही जाती है। हम खुद को चाहे कितना भी आधुनिक समझें, लेकिन विवाह की इच्छा एक ऐसी आधारशिला है जो हमारे लिए रिश्तों तथा परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने और उसे मजबूती देने वाली होती ही है। शादी होने में देरी किसी भी कारण से हो सकती है। कई बार शिक्षा के चलते तो कई बार काम में अच्छी स्थिति बनाने के चलते हम शादी में देरी करते जाते हैं, इसके अलावा अपनी पसंद और अपने प्यार को पाने की इच्छा, शादी में देरी का कारण/Reasons for delay in marriage बन जाती है। लेकिन क्या कारण है कि विवाह में देरी या फिर यह उन योग का प्रभाव हम पर डालते हैं, जो हमारी कुंडली में बने हुए होते हैं। आईये जानने की कोशिश करते हैं की आखिर ज्योतिष दृष्टि से क्या कारण हो सकते हैं जो किसी जातक या जातिका के विवाह में देरी के लिए उत्तरदायी बन जाते हैं।

शादी का योग कब बनता है

किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में विवाह का योग तब शुभता से फलित होता है, जब उस व्यक्ति की कुंडली में सप्तम भाव और सप्तम भाव का अधिपति शुभ स्थिति में मौजूद हो। यदि कुंडली/Kundali में विवाह का कारक और भाव दोनों उत्तम स्थिति में होंगे तो विवाह होने में समय नहीं लगता और व्यक्ति को उसकी पसंद का जीवन साथी भी मिलता है।


अब बात आती है देरी की तो यदि कुंडली में शादी के भाव/Marriage house और भाव का स्वामी यदि पाप प्रभावित होता है, कमजोर अवस्था में कुंडली में स्थिति होता है तो उस कारण विवाह देरी से होने की कई परिस्थितियां जातक के जीवन में प्रभाव डालने लगती हैं और विवाह होने में देरी होती चली जाती है। 


शादी में देरी के योग में क्या है मंगल की भूमिका

 मंगल को विवाह के लिए महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है यह ऊर्जा, यौन संबंधों, रज इत्यादि का कारक बनता है। अगर कुंडली में मंगल की स्थिति मांगलिक योग का निर्माण कर रही होती है तो यह कारण भी विवाह होने में देरी को दर्शाता है, इसके साथ ही इसके प्रभाव से विवाह होने में कई प्रकार से अटकाव भी देखने को मिल सकते हैं। कुंडली में विवाह के लिए मंगल की स्थिति का अहम रोल देखने को मिलता है। 


क्यों रिश्ते मिलने पर भी नहीं बन पा रही है बात ?

ज्योतिष शास्त्र/Astrology में शुक्र, बुध, गुरु और चन्द्र को शुभ ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन कुंडली में ये ग्रह किस भाव के स्वामी हैं इन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है क्योंकि कई बार शुभ ग्रह भी अपनी शुभता नहीं दे पाता है। यदि कुंडली में उसकी स्थिति अनुकूल न हो तो ऐसे में विवाह भाव पर शुभ या अशुभ ग्रह की स्थिति कई कारणों से बनती है। इसलिए आवश्यक होता है ये समझना की कौन सा ग्रह हमारे वैवाहिक जीवन को प्रभावित कर रहा है और किस कारण रिश्तों में बार-बार असफलता ही हाथ लग रही है। 

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