मेष राशि में होगी चंद्र मंगल व राहु की युति

चंद्र मंगल व राहु की युति

 

नव ग्रहों में कोई भी ग्रह जब किसी दूसरे ग्रह के साथ युति में होता है तो यह स्थिति ग्रह फल पर विशेष असर डालती है, क्योंकि दो ग्रह एक साथ होते हैं तो इस स्थिति में दोनों का एक दूसरे पर प्रभाव पड़ता है. ग्रह अपने स्वतंत्र अस्तित्व के रुप में फल दे कर युति योग के फल देता है. किसी भी ग्रह का युति/Planetary Conjunction ग्रह किसी ग्रह के साथ हो रहा है और इसके कैसे फल व्यक्ति विशेष अथवा लोगों पर पड़ेंगे इसका निर्धारण उन ग्रहों के गुण धर्म प्रकृति के आधार पर तथा वह किस राशि में स्थित है इसके अनुसार तय होता है.

 

हम बात करते हैं मेष राशि में मंगल राहु और चंद्रमा के युति की तो सर्वप्रथम कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है. यहां हमें यह समझना होगा की ज्योतिष में मंगल, राहु, चंद्रमा और मेष राशि/Aries Horoscope इन चारों का प्रभाव कैसा होता है इनके तत्व एवं गुण क्या हैं.

 

मंगल ग्रह: ज्योतिष में मंगल को अग्नि तत्व युक्त ग्रह माना गया है. मंगल को सेनाओं का अधिपति माना गया है. वह नायक है सबसे आगे रह कर नेतृत्व करने में सक्षम होता है. क्रोध, उत्साह, तेजी, शीघ्र निर्णय लेने की विशेष क्षमता मंगल को प्राप्त है. मंगल का प्रभाव ही किसी के भीतर जोश, उत्साह, पराक्रम एवं साहस की स्थिति का निर्धारण करता है. मंगल द्वारा जाना जा सकता है की परिस्थितियों पर व्यक्ति विशेष का क्या असर दिखाई देगा. युद्ध विध्वंस ओर मार काट से मंगल ग्रह जुड़ा है.

 

राहु ग्रह: ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह का स्थान प्राप्त होता है. राहु को पाप ग्रह की संज्ञा प्राप्त है. राहु सभी प्रकार की कल्पनाओं संभावनाओं तक पहुंचने की एक सीढ़ी होता है. यह धुआं है जिसके कारण स्थिति को स्पष्ट रुप से समझ पाना अत्यंत मुश्किल होता है. राहु एक प्रकार का धोखा, छलावा और जाल है जो इस प्रकार से फैलता जाता है जिस पर नियंत्रण करने की क्षमता सभी में नही होती है. यह विचारों का जाल है. वास्तविकता से परे की अनुभूति कराने वाला है. राहु ग्रह को हर प्रकार के गलत कृत्यों से जोड़ा गया है, किंतु साथ ही अमृत का पान करने के कारण यह आध्यात्मिक मार्ग का एक महत्वपूर्ण ग्रह भी बन जाता है.

 

चंद्रमा: चंद्रमा को ज्योतिष में एक शुभ ग्रह के रुप में स्थान प्राप्त है. शीतल और जल तत्व की प्रधानता चंद्रमा निहित होती है. चंद्रमा को मन, भावनाओं के साथ जोड़ा जाता है. चंद्रमा की स्थिति मानसिक चेतना को प्रभावित करने वाली होती है. इसी के द्वारा योजनाओं को आगे ले जाने की गति प्राप्त होती है. चंद्रमा का प्रभाव भी अन्य ग्रहों  की भांति जीव, जन्तु, वनस्पतियों समेत सभी पर पड़ता है.

 

मेष राशि: मेष राशि को अग्नि तत्व युक्त एवं चर स्वभाव की राशि माना गया है. इस राशि में गतिशीलता मौजूद होती है तथा कार्य करने की तीव्रता भी मौजूद होती है. उत्साह एवं तेजी से युक्त इस राशि का प्रभाव ऊर्जावान बनाता है. काम करने की प्रेरणा देता है. लगातार प्रतिक्रियाओं में व्यस्त रहना इसका एक विशेष गुण भी है.

मेष राशि में तीनों का योग घटनाओं के निर्माण होने का आधार होगा 

मेष राशि में मंगल, राहु और चंद्रमा का प्रभाव कई मायनों में खास रहता है. यह इस समय काफी हद तक अस्थिर वातावरण देखने को मिलता है. यह व्यक्ति, देश, प्रकृति सभी तरह से अपना असर डालता है. तीन अग्नि तत्व समान के साथ भावनाओं का जाना स्वाभाविक रुप से बड़ी हलचलों के लिए उत्तरदायी भी होता है.

 

जहां राहु और मंगल का योग एक लम्बे समय तक एक स्थान पर होता है वहीं चंद्रमा की स्थिति कुछ कम अंतराल की होती है. क्योंकि गोचर/Planetary Transit में बदलाव होने में राहु साल से अधिक समय लेगा और मंगल 45 दिन से अधिक तो चंद्रमा सवा दो दिन के समय के लिए इस युति में होगा तो कुल मिलाकर घटनाएं अचानक से घटित होंगी क्योंकि चंद्रमा के आने पर इसका तेजी से असर दिखाई देगा. यह इस प्रकार से कार्य करेगा की परिस्थितियां बनी हुई हैं बस उनके घटित होने के लिए उपयुक्त समय की आवश्यकता होगी जो चंद्रमा के द्वारा पूर्ण होगा.

 

वैदिक ज्योतिष में मंगल और राहु दो ऐसे ग्रह हैं जो विध्वंस के लिए विशेष रुप से उत्तरदायी माने गए हैं. कोई भी घटना जो विस्फोटक रुप में दिखाई देती है वह इन दोनों ग्रहों के प्रभाव से अछूती नहीं रह सकती है.

मेदिनी ज्योतिष में राहुमंगल का योग 

मेदिनी ज्योतिष अनुसार राहु मंगल का योग/Rahu Managl Yoga एक प्रकार के दुष्प्रभावों के बढ़ने की संभावनाओं को अधिक दर्शाता है. मंगल और राहु का योग हिंसा और हंगामे का मूल कारण बनकर लोगों को दुख पहुंचा सकता है. इन दो पाप ग्रहों की युति दुनिया के विभिन्न भाग में युद्ध का संकेत है. यह योग/Yoga शासकों को चैन से बैठने नहीं देता है. कूर्म चक्र प्रणाली के अनुसार भारतपाक सीमा और मध्य एशिया के बीच के क्षेत्र में भारत के कुछ हिस्से में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि की संभावना के संकेत भी इस योग से बनते हैं.समाज में नैतिक मूल्यों में गिरावट ला सकता है और प्रचलित राजनीतिक परंपराएं भी नष्ट हो जाती हैं. वैश्विक उछाल, राजनीतिक उथलपुथल कई अन्य देशों में युद्ध और अराजक स्थिति का कारण बन सकती है. इसके अलावा भीषण गर्मी के कारण सूखे की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है

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