बुध के मिथुन राशि में गोचर से किन्हें आएंगी अड़चनें और किनका होगा बेड़ा पार?

बुध मिथुन राशि में गोचर

नवग्रहों में राजकुमार माने जाने वाले बुध देव 25 मई 2020 को प्रात: 12:20 पर निकल कर अपनी ही स्वराशि मिथुन में प्रवेश करेंगे और यहां पर 2 अगस्त 2020 को प्रात: 03:23 तक रहेंगे।

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महत्वपूर्ण बात

बुध देव 18 जून 2020 को प्रात: 10:24 से 12 जुलाई 2020 को दोपहर 01:50 तक वक्री रहेंगे। इसके बाद 12 जुलाई 2020 को दोपहर 01:51 से एक बार फिर मिथुन राशि में रहते हुए मार्गी हो जाएंगे और 02 अगस्त 2020 की सुबह 03:23 बजे तक इसी राशि में रहेंगे।

बुध ग्रह संचार, व्यापार, साझेदारी, उपदेश, शिक्षा, किताबें, गणित, बुद्धि, याद करने की क्षमता, एकाउंटिंग, मार्केटिंग, नेटवर्किंग, विश्लेषणात्मक कौशल और विश्लेषण, छोटे भाई-बहन, दोस्तों आदि का प्रतिनिधित्व करता है।

चूंकि मिथुन राशि संचार, यात्रा, बुद्धिमत्ता, नए विचारों, लेखन आदि की प्रतीक है, इसलिए बुध अपनी मिथुन राशि में गोचर करते हुए खुद को काफी प्रतिष्ठित महसूस करता है।

बुध के मिथुन राशि में गोचर के दौरान सामान्य लेखकों, आईटी में काम करने वाले, राजनेता, ट्रैवल एजेंट, एकाउंटेंट, आयोजकों, विश्लेषकों और पत्रकारों का सफलता के साथ एक अच्छा समय बीतेगा।

सावधानी :

जिनकी जन्म कुंडली में बुध वक्री है, उन्हें व्यापारिक सौदों, एकाउंटिंग से जुड़े कार्यों और बयान देने आदि में बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। 18 जून 2020 से 12 जुलाई 2020 तक बुध के वक्री होने के दौरान आप खुद को बहुत भ्रमित महसूस कर सकते हैं और बीती हुए घटनाओं को लेकर विशेष रूप से चिंतित हो सकते हैं। ऐसे में आपको ज्यादा सोचने की बजाय अपने दिमाग को आराम देने की जरूरत होगी।

यह गोचरआपको कैसे प्रभावित करेगा?

सामान्य रूप से प्रत्येक चंद्र राशि के लिए निम्नलिखित परिणाम हैं। मिथुन राशि में बुध के गोचर का संभावित परिणाम जानने के लिए अपनी राशी के तहत 25 मई 2020 से 02 अगस्त 2020 तक का राशिफल पढ़ें –

नोट:

आपकी वास्तविक जन्मकुंडली में इन सामान्य परिणाम के संशोधित होने की संभावना है, जो कि बुध की स्थिति और मिथुन के साथ-साथ अन्य ज्योतिषीय कारकों जैसे दशा, संयोजन, पहलुओं और नक्षत्रों आदि पर निर्भर करता है। निश्चित रूप से आपकी जन्मकुंडली में बुध के साथ लाभकारी ग्रह आपको अधिक लाभ देंगे।

मेष :

तीसरे और छठे घर का स्वामी बुध का यह गोचर आपकी राशि के तीसरे भाव में हो रहा है जो कि संचार और संवाद करने की क्षमता, पड़ोसी, लेखन, पत्रकारिता, कौशल, सेल्स, पब्लिक स्पीकिंग और छोटे भाई-बहनों आदि से संबंधित है। यह समय युवा एवं दिल से नौजवान हो चुके जातकों के लिए बेहतरीन रहेगा। इस दौरान लेखक, पत्रकार, समाचार एंकर, ज्योतिषी, सेल्स और मार्केटिंग से जुड़े व्यक्ति, वकील और राजनेता सफलता का अनुभव करेंगे। जिन लोगों की जन्मकुंडली में बुध वक्री है, उन्हें अपने पड़ोसियों के साथ व्यवहार करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही संवाद के रास्ते खुले रखने चाहिए।

वृषभ:

आपकी राशि में दूसरे और पांचवे घर का स्वामी बुध दूसरे भाव में है, जो कि बचत और संपत्ति, भाषण, मुंह, परिवार और वंश, भोजन और खाने की आदतों का प्रतीक है। आप अपने कार्य और विरासत के जरिए अपने कुल को आगे बढ़ाने के लिए प्रे​रित होता पाएंगे। सार्वजनिक वक्ता और गायक प्रभावशाली भाषण और प्रेरणादायी गीत बनाएंगे। इस दौरान फाइनेंसर, बैंकर और ज्वैलर्स खूब फलेंगे—फूलेंगे। स्पष्ट संवाद के जरिए प्रियजनों के साथ प्रेम संबंधों में सुधार होगा। जिनकी जन्मकुंडली में बुध वक्री है, उन व्यक्ति को अचानक से कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। यदि आपका कोई टैक्स बाकी है तो उसे जरूर अदा करें।

मिथुन:

आपकी राशि में पहले और चौथे घर का स्वामी बुध पहले भाव में है, जो कि आपके पूरे जीवन के परिदृश्य, व्यक्तित्व, दृष्टिकोण, मन, मानसिक स्वास्थ्य, भावनाएं, सोचने की क्षमता, स्मृति और कौशल आदि का प्रतीक है। इस दौरान आप उपेक्षित रिश्तों से संपर्क साध कर उसके बंद दरवाजों को खोलना पसंद करेंगे। घरेलू सामंजस्य और शांति बढ़ेगी। राजनीति में प्रवेश करने की संभावनाएं बनेंगी। सेल्स और मार्केटिंग से जुड़े लोग फलेंगे—फूलेंगे। कुल मिलाकर यह गोचर व्यवसायिक व्यक्तियों के लिए अनुकूल है। शादीशुदा लोगों को अपने वैवाहिक बंधन को मजबूत करने के लिए एक साथ समय बिताना बेहतर रहेगा।

कर्क :

आपकी राशि में तीसरे और बारहवें घर का स्वामी बुध बारहवें भाव में हैं, जो कि धन हानि या अशांति, खर्च, विदेशी भूमि और विदेशी आवास, अलगाव, उच्च स्थानों, अस्पताल में भर्ती होने और आध्यात्मिक खोज और बदलाव का सूचक है। विदेशी समझौता चाहने वाले सफल हो सकते हैं। लेखन के लिए लेखकों के पास नए विचार होंगे। जिनकी जन्म कुंडली में बुध वक्री है, उन्हें संवाद की कमी के चलते अपमानित होने से बचना चाहिए।

सिंह:

आपकी राशि में दूसरे और ग्यारहवें घर का स्वामी ग्यारहवें भाव में है जो कि लाभ, बड़े भाई-बहन, दोस्तों और सामाजिक दायरा, इच्छाओं, आशाओं और इच्छाओं की पूर्ति, सामाजिक समूहों आदि का प्रतीक है। यह गोचर लाभ प्राप्ति, आशाओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए अनुकूल है। इस दौरान शेयर दलाल, मैनेजर, एकाउंटेंट, सामाजिक कार्यकर्ता फलेंगे—फूलेंगे। समाज के किसी तबके से जुड़कर लाभ की उम्मीद की जा सकती है। आप नई चीजें सीखेंगे और बच्चों की शिक्षा पर भी ध्यान देंगे।

कन्या:

आपकी राशि के पहले और दसवें घर का स्वामी बुध दसवें भाव में हैं जो कि कर्म, करियर, कर्तव्य, प्रतिष्ठा, स्थिति, सार्वजनिक छवि, पिता और सरकार के साथ संबंध और संचार आदि का प्रतीक है। बुध यहां पर गोचर करते हुए खुद को बहुमुखी और बहुत शक्तिशाली महसूस करता है। इस दौरान पत्रकार, एकाउंटेंट, लेखक, सॉफ्टवेयर डेवलपर, गणितज्ञ, सीए, राजनीतिज्ञ, सरकारी अधिकारी वर्ग को सफलता हाथ लगेगी।

तुला:

आपकी राशि में नौवें और बारहवें घर का स्वामी बुध नवम् भाव में है जो कि भाग्य, दर्शन, धर्म, तीर्थ, पिता की शिक्षा, विदेश यात्रा, उच्च अध्ययन आदि को दर्शाता है। विशेष रूप से उच्च शिक्षा के लिए विदेश यात्रा में कुछ कठिनाइयां या फिर देरी हो सकती है। आपके द्वारा लिखी गई चीजों के प्रकाशन के लिए उत्तम समय होगा। जिन जातकों की जन्म कुंडली में बुध वक्री है, उन्हें अभिमान और स्वार्थ भरी मानसिकता के चलते होने वाले नुकसानों से बचने के लिए सतर्क रहना चाहिए।

वृश्चिक:

आपकी राशि में आठवें और ग्यारहवें घर का स्वामी बुध अष्टम भाव में है जो कि अचानक परिवर्तन, दुर्घटना, रहस्य और गोपनीयता, अनुसंधान, खुदाई, ससुराल से संबंध, संयुक्त संपत्ति, कर और सरकार की गुप्त नीतियों आदि का प्रतीक है। इस दौरान तांत्रिक सिद्धि के लिए प्रयासरत लोग सफल हो सकते हैं। साथ ही पुरातत्वविदों, जासूस, खनिक, तेल खोजकर्ता, खजाने की खोज करने वाले, शोधकर्ताओं को लाभ होगा। जिन जातकों की जन्म कुंडली में बुध वक्री है, उन्हें जोखिम भरे कार्यों से बचना चाहिए। यदि आपकी बीमा की कोई किस्त या आपका कोई टैक्स बाकी हो तो उसे चुका दें। साथ ही अपने ससुराल वालों के साथ संवाद के रास्ते खुले रखें।

धनु:

आपकी राशि से सातवा और दसवें घर का स्वामी बुध सप्तम भाव में है जो कि विवाह और साझेदारी, अनुबंध, सौदे, व्यापार, ट्रेडिंग आदि का प्रतीक है। आप आत्मसम्मान में वृद्धि महसूस करेंगे और अच्छे संपर्कों की मदद से लोगों तक पहुंचने की क्षमता बढ़ेगी। बुध का यह राशि परिवर्तन सामान्य रूप से बिजनेस के लिए एक अनुकूल साबित होगा। इस दौरान वकील, ठेकेदार, शादी कराने वाले लोग, राजनेता, अधिकारी खूब फलेंगे—फूलेंगे।

मकर:

आपकी राशि से छठे और नौवें घर का स्वामी छठे भाव में है जो कि घर की दिक्कतों, तमाम तरह की बाधाओं, बीमारी, मुकदमेबाजी, ऋण, शत्रु, सेवा, छोटे जानवरों, तलाक आदि का सूचक है। ऐसे में आपके मन में मौजूदा परेशानियों को सुलझाने का ख्याल आएगा। वकील सफल होंगे और केस जीतेंगे। फाइनेंसर, वित्तीय सलाहकार, टैक्स प्लानर खूब फलेंगे-फूलेंगे। लेकिन जिनकी जन्म कुंडली में बुध वक्री है, उन्हें अपनी सेहत को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। इस दौरान तलाक की चाहत रखने वालों की मंशा पूरी हो सकती है।

कुंभ:

आपकी राशि से पांचवें और आठवें घर का स्वामी बुध पंचम भाव में है, जो कि बच्चों, बुद्धि, प्रेम संबंधों, शिक्षा, रोमांस, प्राचीन ग्रंथों, पिछले जीवन कर्मों, सट्टा जैसे शेयर बाजार, लॉटरी, सिनेमा, टीवी, अभिनय आदि का सूचक है। ऐसे में सट्टा लगाने वालों के साथ अचानक कोई घटना घट सकती है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में बुध वक्री हैं, उन्हें अपने बच्चों पर अत्यधिक दबाव नहीं डालना चाहिए। प्राचीन शास्त्रों का अध्ययन करने के लिए यह सबसे अच्छा समय है। अचानक कहीं से धन मिलने पर स्टॉक ब्रोकर लाभान्वित होंगे। संवाद और खुलकर बात करने से प्रेम संबंध मजबूत होंगे।

मीन:

आपकी राशि से चौथे और सातवें घर का स्वामी बुध चौथे भाव में है, जो कि मातृभूमि, बचपन से जुड़ी यादें, माँ और माँ के पोषण, मन की शांति, वाहन, प्रारंभिक स्कूली शिक्षा आदि का सूचक है। जीवनसाथी के साथ अच्छे संबंध और सामंजस्यपूर्ण घरेलू वातावरण बनाने के लिए यह सबसे अच्छा समय है। घरेलू मामले में मां की बड़ी भूमिका रहेगी। रियल एस्टेट या घर से जुड़े व्यापार करने वालों को फायदा होगा। आपको अपनी माँ से मिली सीख का लाभ होगा। इस दौरान आप एक नया वाहन खरीद सकते हैं।

यह पूरा विश्लेषण बड़े पैमाने पर वैदिक ज्योतिष के मूल सिद्धांत पर आधारित है। हालांकि, इसके विशेष प्रभाव को जानने के लिए आपको हमेशा एक अच्छे ज्योतिषी से परामर्श करने का सुझाव दिया जाता है क्योंकि बहुत सी चीजें आपके स्वयं के कर्मों पर भी निर्भर करती हैं।

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