नहीं बन रहा है अगर काम तो घबरायें नहीं बजरंगी जी देंगे जवाब

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नहीं बन रहा है अगर काम तो घबरायें नहीं बजरंगी जी देंगे जवाब! इस कथन की विस्तारपुर्वक व्याख्या करते हुये, बात करते है कि ज्योतिष शास्त्र द्वारा किसी भी व्यक्ति की समस्याओं को आसानी से कैसे सुलझाया जा सकता है। घर परिवार में चल रहे विवाद हो, रिश्तों में तनाव का हो, विवाह से संबंधित समस्या हो, बिजनेस में हो रहा नुकसान या कार्यक्षेत्र से जुड़ी बातें अथवा स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी सवाल आपके जीवन को अगर प्रभावित कर रहा हो या फिर आपके कामों में किसी न किसी कारण से रुकावटें उत्पन्न हो रही हों, तो इन सभी बातों का जवाब ज्योतिष शास्त्र में मौजूद है। अपनी किसी भी समस्या से संबंधित प्रश्नों के उत्तर आप यहां बहुत ही सरलता से प्राप्त कर सकते हैं। इस सबसे पहले आइये जानते हैं की कैसे ज्योतिष शास्त्र/Astrology से आप अपनी समस्याओं का हल पा सकते हैं।

वेद के छह: अंगों में से एक है ज्योतिष शास्त्र, जिसे वेदों के नेत्र/Eyes of Veda की संज्ञा प्रदान है। ज्योतिष शास्त्र एक ऐसी विद्या है, जिसे जानकर व्यक्ति सृष्टि के रहस्यों को भी देख पाने में सक्षम हो जाता है। एक अच्छा ज्योतिषी ही ज्योतिष के द्वारा भविष्य की भविष्यवाणी को करने में सक्षम होता है।

एक अच्छे ज्योतिषी को ज्योतिष शास्त्र का संपूर्ण ज्ञान होना चाहिए। मात्र ज्योतिष की कुछ बातों को सीख लेने से कोई ज्योतिषी/Astrologer नहीं बन पाता है, अथक परिश्रम, ज्ञान, गणित, वेद-शास्त्र, आयुर्वेद, योग, मंत्र, ग्रह, दशा, और गोचर द्वारा फलकथन त्रिस्कंध इत्यादि का संपूर्ण ज्ञान होना आवश्यक होता है। ज्योतिषी की प्रज्ञा, अंतर्ज्ञान एवं आन्तरिक समझ उत्तम होनी चाहिए। देश, काल और पात्र का ज्ञान होना चाहिए। सद्गुण, संयम, तर्कशीलता इत्यादि गुण उसमें होने चाहिए।

एक अच्छे ज्योतिषी के विषय में पराशर ऋषि कहते हैं किगणितेषु प्रवीणो यः शब्दशास्त्रे कृतज्ञमः।

न्याय विद् बुद्धिमान देश दिक्कालज्ञो जितेन्द्रियः ।। ऊहापोहपटुर्होरास्कन्ध श्रवण सम्मतः । मैत्रेय सत्यतां याति तस्य वाक्यं न संशयः ।। जो भी जातक इन गुणों में योग्य होता है वह एक अत्यंत सत्यवक्ता स्वरूप ज्योतिषी बनता है।

कुंडली द्वारा भविष्यवाणी/Kundli Prediction

जन्म कुंडली/Birth Chart द्वारा किसी भी जातक के जीवन में घटने वाली विभिन्न प्रकार की घटनाओं को जान पाना संभव हो पाता है। जन्म कुंडली में मौजूद ग्रहों का प्रभाव, योगों का निर्माण, दशा एवं गोचर के आधार पर घटनाओं को समझने में सहायता मिलती है। कुंडली के सही विश्लेषण द्वारा ही उचित एवं निर्णायक भविष्यवाणी संभव हो पाता है। जन्म कुंडली व्यक्ति के संपूर्ण जीवन का एक आधार बनती है। कुंडली द्वारा व्यक्ति के जीवन में शुभ ग्रहों एवं अशुभ ग्रहों की स्थिति को जान कर कार्य करने से सकारात्मक फलों की प्राप्ति संभव हो पाती है। जन्म कुंडली में ही छुपा होता है व्यक्ति के जीवन की सफलता का राज। सही रूप से किया गया कुंडली विश्लेषण ही व्यक्ति को उचित निर्णय लेने में सहायक बनता है।

गोचर/Transit

ज्योतिष शास्त्र में गोचर का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। गोचर के द्वारा ही फल प्राप्ति संभव हो पाती है।  व्यक्ति के जीवन में कौन सी घटना कब घट सकती है और कब मनोकूल परिणाम प्राप्त हो सकते हैं, इन सभी बातों में गोचर अहम भूमिका निभाता है। जिस प्रकार कुंडली शुभा शुभ योगों ग्रहों की स्थिति इत्यादि को दर्शाती है, उसी प्रकार गोचर उन ग्रहों एवं योगों के शुभ फलों को देने में प्रमुख कारक बनता है। सभी नवग्रहों/Navgrahon का गोचर किसी न किसी रूप में विशेष भूमिका निभाता है। कुंडली के प्रत्येक भाव पर ग्रहों का गोचर एवं गोचर दृष्टि संबंध होने पर विभिन्न प्रकार के फल प्रदान करते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने विवाह के विषय में जानना चाहता है, तो कुंडली में विवाह भाव/Marriage house की स्थिति और ग्रहों की स्थिति को देख कर वैवाहिक सुख के बारे में बताया जा सकता है। उसी प्रकार गोचर द्वारा उसका विवाह कब होगा या वैवाहिक जीवन में कब-कब परिस्थितियां अनुकूल या विपरीत रह सकती हैं, इन सभी बातों का वर्णन गोचर द्वारा संभव होता है।

कुंडली में भाव/houses in Kundali

कुंडली का निर्माण बारह भावों द्वारा संपन्न होता है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष में बंटे हुए यह कुंडली के 12 भाव, जो किसी भी व्यक्ति के संपूर्ण जीवन का वर्णन करते हैं। फलदीपिका हो या बृहतजातक सभी ग्रंथों ने भावों की महत्ता को मुखर रूप से दर्शाया है। हर भाव जीवन के हर एक रंग पर अपना-अपना असर डालता है। शुभ भाव हों या पाप भाव सभी का अपना महत्व होता है।

इन भावों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने की आवश्यकता होती है। कोई भाव कब अच्छा तथा कब खराब फल देगा इस बात को भी समझना अत्यंत जरूरी होता है। भाव का बाहरी रूप घटनाओं को दर्शाता है, लेकिन आंतरिक रूप उचित अर्थों को दर्शाता है, उदाहरण के लिए सप्तम भाव विवाह के बाहरी कारक रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसका आंतरिक महत्व दो व्यक्तियों के मध्य का संबंध एवं उनकी समझ को दर्शाता है। कुंडली का कोई भाव कब मजबूत होता है और कब निर्बल होगा, इन बातों को जान कर ही भविष्यवाणी सही ढंग से कर पाना संभव होता है। यदि आप किसी बिजनेस पार्टनरशिप के बारे में सोच रहे हैं, तो भी ज्योतिष आपको सही निर्णय लेने में सहायक साबित हो सकता है।

जन्म कुंडली विश्लेषण देता है सटीक जवाब

किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली को ही अंग्रेजी भाषा में होरोस्कोप/Horoscope कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति का कुंडली का निर्माण ग्रह नक्षत्रों की खगोलीय स्थिति के अनुसार संपन्न होता है। यह एक वैदिक गणितीय क्रम है, जिसके द्वारा गणना करके किसी के लिए भी कुंडली निर्माण कर पाना संभव हो पाता है। जन्म समय, जन्म तिथि एवं जन्म स्थान के द्वारा कुंडली का निर्माण संभव होता है। कुंडली का निर्माण एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य होता है, जिसे एक योग्य ज्योतिषी ही कर सकता है, क्योंकि इसमें सूक्ष्म ज्ञान की आवश्यकता होती है। जब कुंडली का निर्माण संपूर्ण होता है तो उसके पश्चात इसमें इसे पढ़ने और आंकलन करने का कार्य भी योग्य ज्योतिषी द्वारा ही संभव हो पाता है। बजरंगी धाम/Bajrangi Dham में आपको मिलता है सटीक कुंडली का विश्लेषण और सही मार्गदर्शन जिसके जरिए आप सभी अपने जीवन की समस्याओं से छुटकारा पाकर अपने जीवन को सुखमय एवं आनंद से पूर्ण बना सकते हैं।

यदि आपको अपने जीवन में कोई भी परेशानी हो चाहे वह बिजनेस में कोई काम ना बनना, रुका हुआ टेंडर, विवाह में देरी और अन्य जीवन की समस्या, उन सभी के बारे में आपको डॉ विनय बजरंगी से सहायता मिल सकती है।

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