आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2022 का महत्व और जाने क्या है इस गुप्त नवरात्रि में खास

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2022

प्रत्येक वर्ष में आने वाली चार नवरात्रि में दो नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के रुप में मनाई जाती है। माघ और आषाढ़ माह में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त अर्थात छुपा हुआ रहस्यात्मक स्वरुप, जिसमें साधना का पक्ष अत्यंत प्रबल होता है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि को गृहस्थ लोगों के लिए जितना महत्वपूर्ण माना गया है, उसी अनुसार एकांत एवं गुप्त रुप से की जाने वाली यह गुप्त नवरात्रि विशेष रुप से सन्यासियों एवं तांत्रिक उपासकों के लिए मानी गई हैं। इस समय पर देवी के दस महाविद्या रुपों का पूजन एवं व्रत होता है और इसी कारण यह साधना अत्यंत गोपनिय रुप से भी संपन्न होती हैं। इस समय शक्तियों का नव रुप उग्र एवं प्रचंड दिखाई देता है। शक्ति के ये दस रुप तांत्रिक साधना पद्धति में विशेष रुप से पूजे जाते हैं तथा शक्ति संप्रदाय में इन गुप्त नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व माना गया है। यह आध्यात्मिक ऊर्जा को प्राप्त करने और योग आत्मबल के द्वारा सिद्धियों को प्राप्त करने वाला समय भी होता है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में होती है दस महाविद्या की उपासना

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं को पूजा जाता है जो इस प्रकार है: – महाविद्या काली, महाविद्या तारा, महाविद्या ललिता, महाविद्या भुवनेश्वरी, महाविद्या त्रिपुर भैरवी, महाविद्या छिन्नमस्ता, महाविद्या धूमावती, महाविद्या बगलामुखी, महाविद्या मातंगी, महाविद्या कमला। यह दस महाविद्या तंत्र कर्म में विशेष स्थान रखती है। गुप्त नवरात्रि के प्रत्येक दिन में एक महाविद्या का पूजन होता है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में हर दिन बनेगा शुभ योग

  • गुप्त नवरात्रि के पहले दिन गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग के साथ वृद्धि योग का बनना शुभ फलप्रदान करने वाला होता है। इन योग के समय की जाने वाली साधना पूजा साधक के लिए उत्तम फल प्रदान करती है। 
  • गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन पुष्य नक्षत्र होगा, रवियोग होगा और  जगन्नाथ रथयात्रा पर्व भी होगा। दूसरे दिन बन रहे शुभ योगों का प्रभाव साधना को आगे ले जाने में और कार्यों में सफलता प्रदान करने वाला होगा। 
  • गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन रवियोग का निर्माण होगा। इस योग के प्रभाव स्वरूप पूजा कार्यों को सफलता प्राप्ति होगी। इस समय पर सिद्धि प्राप्ति एवं वस्तुओं की प्राप्ति का शुभ समय होगा।
  • गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन विनायक चतुर्थी पर्व के साथ ही रवि योग निर्मित होगा अत: इस दिन भी उपासना सिद्धि कार्यों में सफलता प्राप्त होगी तथा आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि प्राप्त होगी। 
  • गुप्त नवरात्रि पांचवें दिन स्कन्द षष्ठी पर्व के साथ रवि योग भी होगा। इस दिन पूजा करने से संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होगा तथा शुभ फलों की प्राप्ति होगी। 
  • गुप्त नवरात्रि के छठे दिन त्रिपुष्कर और रवियोग का निर्माण एक साथ संभव होगा। इस दिन किया जाने वाला कोई भी कार्य तीन गुना शुभ फल देने वाला होगा। इस समय पर की जाने वाली उपासना द्वारा भक्त के पापों का नाश होगा तथा उसकी साधना को शुभ फल प्राप्त होंगे। 
  • गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन सूर्य सप्तमी पर्व, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग बनेगा। इस दिन देवी का पूजन कामनाओं को पूर्ण करने वाला होगा। इस समय पर के दौरान देवी की पूजा घर परिवार में सुख समृद्धि प्रदान करने वाली होगी।
  • गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन हस्त नक्षत्र, परिघ योग के साथ मासिक दुर्गाष्टमी पूजन होगा। इस दिन उपासना कार्यों के द्वारा मांगलिक सुखों की प्राप्ति होगी तथा कार्य बिना किसी रुकावटों के पूर्ण होंगे। 
  • गुप्त नवरात्रि के नवें दिन भड़ली नवमी का पर्व, चित्रा नक्षत्र शिव योग निर्मित होगा। इस दिन गुप्त महानवरात्रि पूजन का समय होगा। देवी की साधना का अंतिम चरण पूर्ण होगा। साधक को माँ भगवती का आशीर्वाद प्राप्त होगा। आध्यात्मिक साधना एवं सिद्धि प्राप्ति के लिए यह दिन अत्यंत विशेष होगा। इस दिन भक्त माता के आशीर्वाद को पाकर जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति पाता है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पूजा अनुष्ठान

गुप्त नवरात्रि का हिंदू अनुष्ठान और इसका महत्व गुप्त रूप से प्रबल बताया गया है। गुप्त नवरात्रि के समय पर देश भर के शक्तिपीठों एवं देवी मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का आरंभ हो जाता है। इस समय पर तंत्र साधना का गढ़ माने जाने वाले शक्ति स्थलों पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं चंडी यज्ञ, दुर्गा सप्तशती पाठ, स्त्रोत, जागरण कीर्तनों का आयोजन होता है। माता की विशेष आरती भी इस समय पर होती है और प्रत्येक दिन विशेष भोग अर्पित किए जाते हैं। इस समय पर क्षीर भवानी मेला, कामाख्या मेला इत्यादि का आयोजन भी होता है।

 

गुप्त नवरात्रि का समय सिद्धि प्राप्ति के लिए अमूल्य होता है। इस समय पर साधक की साधना के पूरा होने तथा उसके भीतर अद्भुत शक्तियों के जागृत होने का समय भी होता है। देवी की साधना यदि पुर्ण श्रद्धा एवं शुद्ध सात्विक रुप से की जाती है तो यह अमोघ फल प्रदान करने वाली होती है। गुप्त नवरात्रि के समय पर किया जाने वाला पूजा पाठ कई तरह की समस्याओं से निजात दिलाने में सहायक होता है।

नकारात्मक तत्व समाप्त होते हैं 

यदि किसी भी प्रकार की बाधाएं जीवन में मौजूद हैं या किसी प्रकार की नकारात्मकता का प्रभाव पड़ रहा है तो ऎसे में गुप्त नवरात्रि पर की जाने वाली पूजा से इन सभी दुष्प्रभावों से मुक्ति पाना आसान होता है। गुप्त नवरात्रि पूजन से जीवन में सकारात्मक शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

विवाह संबंधी समस्याएं होती हैं समाप्त 

गुप्त नवरात्रि पूजन द्वारा मांगल्य सुख की प्राप्ति होती है। जीवन में यदि विवाह न होना अथवा विवाह सुख में कोई बाधा हो तो उसका समाधान भी होता है। नवरात्रि पूजन में देवी का आशीर्वाद सौभाग्य प्रदान करता है।

सुख समृद्धि का होता है आगमन 

गुप्त नवरात्रि पूजन द्वारा जीवन में आर्थिक विपन्नता दूर होती है। यदि कर्ज या धन से संबंधित कोई समस्या हो तो गुप्त नवरात्रि पूजन करने से इन समस्याओं का समाधान होता है। आर्थिक तंगी समाप्त होती है तथा सुख एवं समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तिथि 

प्रथमा तिथि, 30 जून 2022, दिन बृहस्पतिवार

द्वितीया तिथि, 1 जुलाई 2022, दिन शुक्रवार

तृतीया तिथि, 2 जुलाई 2022, दिन शनिवार

चतुर्थी तिथि, 3 जुलाई 2022, दिन रविवार

पंचमी तिथि, 4 जुलाई 2022, दिन सोमवार

षष्ठी तिथि, 5 जुलाई 2022, दिन मंगलवार

सप्तमी तिथि, 6 जुलाई 2022, दिन बुधवार

अष्टमी तिथि, 7 जुलाई 2022, दिन बृहस्पतिवार

नवमी तिथि, 8 जुलाई, 2022, दिन शुक्रवार

 

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