क्या है आषाढ़ अमावस्या का महत्व, इस दिन ये शुभ काम करने से जीवन में आती है खुशहाली

आषाढ़ अमावस्या

हिन्दू धर्म के अनुसार आषाढ़ मास हिन्दू वर्ष का चौथा महीना होता है। आषाढ़ महीने में पड़ने वाली अमावस्या को आषाढ़ अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ अमावस्या की तिथि का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि यह दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले तर्पण के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों, धार्मिक तीर्थ स्थलों पर स्नान करने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है की आज के दिन देवी देवताओं का पूजन, पितृ तर्पण, श्राद्ध कार्य, उपाय, तीर्थ स्थलों पर स्नान, यज्ञ, जप-तप दान आदि बहुत से कर्म किए जाते है।

आज के दिन किए गए कर्म जहां व्यक्ति को सुख समृद्धि देते है वहीं कुंडली में चल रहे ग्रह नक्षत्रों के अशुभ दोषों से मुक्ति भी दिलाते हैं। हिन्दू धर्म में आषाढ़ के महीने का बहुत अधिक योगदान, क्योंकि इसी के आधार पर हमारे कृषि की उन्नति निर्भर करती है। आषाढ़ अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं इस दिन हल और खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा की जाती है किसान विधि-विधान से हल पूजन करके ईश्वर से फसल हरी-भरी बनी रहने की कामना करते हैं इस बार आषाढ़ अमावस्या 28 जून 2022 को सुबह 5.52 मिनट पर शुरू होगी और 29 जून 2022 को सुबह 8.23 मिनट पर ख़त्म होगी।

आषाढ़ अमावस्या मुहूर्त

अमावस्या तिथि आरंभ: 28 जून, सुबह 05:52 मिनट से (पितृ कार्य हेतु)

अमावस्या तिथि समाप्त: 29 जून, सुबह 08:23 मिनट तक (देव व स्नान कार्य हेतु)

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आषाढ़ अमावस्या पर करें ये शुभ काम

  • पूर्णिमा की तरह की अमावस्या में भी स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इसलिए आषाढ़ अमावस्या के दिन जल्दी उठें और किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित होता है। इसलिए उनका तर्पण करना चाहिए। स्नान के बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण जरूर करें।
  • आषाढ़ अमावस्या के दिन पूर्वजों को पिंडदान किया जाता है। ऐसा करने से पूर्वजों को शान्ति और मोक्ष प्राप्त होता है।
  • आषाढ़ अमावस्या पर यज्ञ कराना चाहिए। इससे पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।
  • आषाढ़ अमावस्या पर भगवान सूर्य, भगवान शिव, माता गौरी और तुलसी की 12 बार परिक्रमा करनी चाहिए।
  • आषाढ़ अमावस्या पर किसी गरीब या जरूरतमंद को दान-दक्षिणा दें। इस दिन घर आए किसी व्यक्ति को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
  • आषाढ़ अमावस्या के दिन यदि कोई बच्चा पैदा होता है तो शांति-पाठ कराया जाता है।
  • जिन व्यक्तियों की कुंडली में पितृ दोष हो या संतानहीन योग बन रहा हो उन व्यक्तियों को आषाढ़ अमावस्या पर उपवास अवश्य रखना चाहिए।

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आषाढ़ अमावस्या का महत्व

आषाढ़ अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके सूर्य भगवान को जल देने का बहुत महत्व है। इस दिन लोग पवित्र नदी में स्नान करके पितरों की शांति के लिए दान करते हैं। इस दिन यज्ञ करने का अनंत फल मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ की अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण तथा श्राद्ध के लिए अत्यंत अनुकूल होती है। ऎसी मान्यता है की आषाढ़ अमावस्या में किए गए पितरों के तर्पण से वह प्रसन्न होते है और सुख -समृद्धि का आशीर्वाद देते है। इस दिन खासतौर से पितरों को प्रसन्न करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

पितरों की शांति के लिए गरीबों की सेवा करनी चाहिए और जरूरतमंदों को खाना और दक्षिणा देनी चाहिए। ऐसा माना जाता है की आज के दिन पूजा-पाठ और दान पुण्य करने से कुंडली दोष भी ख़त्म हो जाते हैं। इस दिन से किसी भी शुभ काम की शुरुआत की जा सकती है। अमावस्या पर पेड़-पौधे भी लगाए जाते है ऐसा करने से कई तरह के दोष और अनजाने में हुए पाप दोष से मुक्ति मिलती है। लोग उन वस्तुओं की पूजा करते हैं, जिनका वह रोजमर्रा में प्रयोग करते हैं। इससे उन्हें उचित मान-सम्मान मिलता है और घर में खुशहाली आती है। सिंचाई के सीमित साधन होने की वजह से आषाढ़ मास की अमावस्या के दिन यज्ञ करने पर फसल को नुकसान नहीं पहुंचता और जल की कमी नहीं होती है

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आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। वैसे तो आषाढ़ अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने का विधान है लेकिन अगर नदी स्नान संभव न हो तो आप घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद सबसे पहले सूर्य देव को जल से अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद पितरों का तर्पण करना चाहिए। ऐसा माना जाता है की आज के दिन हम जो भी दान आदि करते है उसका लाभ हमारे पितरों को मिलता है। पितरों की आत्मा प्रसन्न होती है और उनका ढेर सारा आशीर्वाद मिलता है। आषाढ़ अमावस्या के दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव, माता गौरी और तुलसी पूजन भी करनी चाहिए। अपने पितरों को भी प्रसन्न करने के लिए पवित्र जल से स्नान करके उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। ऐसा करने से खेतों में अच्छी उपज होती है और किसानों को वरुण देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सिंचाई के सीमित साधन होने की वजह से आषाढ़ मास की अमावस्या के दिन यज्ञ करने पर फसल को नुकसान नहीं पहुंचता और जल की कमी नहीं होती है।

आषाढ़ अमावस्या के दिन ध्यान रखने वाली बातें

  • आषाढ़ अमावस्या के दिन खेतों में हल नहीं चलाना चाहिए और खेत जोतना भी नहीं चाहिए।
  • आषाढ़ अमावस्या के दिन क्रय और विक्रय नहीं करना चाहिए।
  • इस दिन मांस- मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • आषाढ़ अमावस्या के दिन घर में किसी भी प्रकार की गंदगी नहीं होनी चाहिए।
  • इस दिन अपने बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना चाहिए।
  • किसी जरूरतमंद की मदद की करनी चाहिए।

हिन्दू धर्म में आषाढ़ अमावस्या को अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस दिन पितृ निवारण के उपाय करने से समस्त कष्ट दूर होते हैं। अतः इस दिन पितरों को प्रसन्न करना चाहिए ताकि आपको अपने पितरों का स्नेह और आशीर्वाद मिले और आपके खुशहाल जीवन में किसी तरह की कोई बाधा उत्पन्न ना हो सके। इस दिन किये गए दान का पुण्य लाखों गुना मिलता है यही नहीं मृत्यु के बाद मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। इसलिए यह दिन विशेष रूप से अति फलदायक है।

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