विवाहित जोड़े द्वारा सामना की जाने वाली 10 सबसे आम विवाहित जीवन समस्याएं

विवाहित जीवन समस्याएं

विवाह को हिन्दू धर्म में एक अटूट बंधन क रूप में देखा जाता है। कुछ सालों पहले तक इसे जन्मों जन्मांतर का रिश्ता माना जाता था पर अब रोज़ बढ़ते तलाक व अलगाव के केस इस मान्यता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे है।  आखिर क्यों विववाह का अटूट बंधन एक कमज़ोर धागा मात्र बन कर रह गया ह। क्यों आजकल के नव दम्पति वैवाहिक बंधन को उस दृणता से नहीं निभा पाते जो कभी उनके बड़ो ने निभाया था। ज्योतिष वैवाहिक जीवन की समस्याएं पल में हल कर सकता है। यह आपकी जन्म कुंडली के आधार पर आपके वैवाहिक जीवन की समस्याओं को उजागर कर आपको उनसे छुटकारा पाने में मदद करता है। कभी-कभी पार्टनर शादी के तुरंत बाद झगड़ते हैं और कभी-कभी समय बीतने के साथ वे अपने रिश्ते का आकर्षण खो देते हैं। नव दम्पतियों के बीच झगड़े, असहमति और अंत में नफरत के पीछे कई कारण हो सकते हैं लेकिन ज्योतिष, दाम्पत्य जीवन में आने वाली हर समस्या को एक अलग नजरिए से देखता है।

एक परेशानी भरी शादी और कुछ नहीं पर हमारी जन्म कुंडली में उपस्थित खराब ग्रहों के प्रभाव का परिणाम है जिनके तार कहीं न कहीं हमारे पिछले जन्मों से जुड़े होते हैं। ज्योतिषीय योग आपको यह जानने में मदद कर सकते हैं कि इस जीवन में आप अपने वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना क्यों कर रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र निश्चित रूप से आपके वैवाहिक जीवन को पटरी पर ला सकता है लेकिन एक सही विवाह भविष्यवाणी करने के लिए कई चीजों की जाँच करने की आवश्यकता होती है जो केवल एक विशेषज्ञ और विद्वान ज्योतिषी ही कर सकता है। इसलिए अपना ज्योतिषी अत्यंत सावधानी से चुनें।

विवाह हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय है और इसे हमेशा ज्योतिषीय मार्गदर्शन के बाद ही लेना चाहिए। अधिकतर आपसी अनुकूलता की कमी ही पति पत्नी के बीच झगडे का प्रमुख कारण बनती है। अतः वैवाहिक जीवन में बांधने से पहले यह बहुत ज़रूरी है कि एक बार कुंडली मिलान अवश्य करवाया जाये और एक अनुभवी ज्योतिषी की सलाह ली जाये। विवाह ज्योतिष वैवाहिक जीवन में आने वाली 10 सबसे आम समस्याओं की गणना करता है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि इन समस्याओं को एक प्रभावी ज्योतिषीय मार्गदर्शन से हल किया जा सकता है।

विवाहित जीवन में आने वाली 10 सबसे आम समस्याएं

1. आपसी अनुकूलता का अभाव – कुंडली में भकूट दोष होने पर पार्टनर एक-दूसरे को समझने में असफल हो जाते हैं। जन्म नक्षत्र और राशि स्वामी जातकों की मानसिकता को दर्शाते हैं। पारस्परिक अनुकूलता के लिए राशि व नक्षत्र स्वामियों में मित्रता होना बहुत ही आवश्यक है।

2. कम्युनिकेशन गैप – शुरुआती चरणों में, दंपति बहस करने या उन पर चर्चा करने के बजाय शिकायतों को दबाने का प्रयास करते हैं। लेकिन समय बीतने के साथ गलतफहमियों का ढेर लग जाता है और उनके बीच कड़वे रिश्ते बनने लगते हैं। बुध और द्वितीय भाव की स्थिति यहां प्रमुख भूमिका निभाएगी।

3. अति प्रभुत्व– कभी-कभी एक जीवन साथी अपने साथी को बिल्कुल अपने जैसा बनाना चाहता है। व्यावहारिक रूप से यह संभव नहीं है और बार बार हस्तक्षेप से रिश्तों में खटास आने लगता है। हस्तक्षेप सीमाओं के भीतर होना चाहिए और आपसी तालमेल पर हावी नहीं होना चाहिए।

4. विवाहेतर संबंध– यदि अशुभ ग्रह कुंडली में लग्न या चंद्रमा को प्रभावित करें तो व्यक्ति विवाहेतर सम्बन्ध बना सकता है। यह शादी की मधुरता को समाप्त कर देता है।  

5. वित्तीय मुद्दे– कभी-कभी वित्तीय समस्याएं भी विवाह में भारी परेशानी पैदा करती है। पत्नी अपने साथी से यह अपेक्षा कर सकती है कि वह उसे वित्तीय सुरक्षा प्रदान करे जो कि पुरुष साथी पूरा करने में असमर्थ हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपसी मनमुटाव होने लगता है।

6. ईर्ष्या और अभिमान– ऐसा तब होता है जब दोनों पार्टनर नौकरी करते हो या कमा रहे हों। यदि एक का वेतन दुसरे से अधिक है तो यह ईर्ष्या या असुरक्षा की भावना को जन्म दे सकता है। इससे जीवन साथियों के बीच दूरियां पैदा होती हैं।

7. यौन अंतरंगता की कमी– अति व्यस्तता या थकान के कारण भी पति-पत्नी में यौन संबंधों में कमी पायी जा सकती है। यह समय के साथ वैवाहिक जीवन के आकर्षण को समाप्त कर देता है। ज्योतिष के अनुसार यदि युगल शुक्र को मजबूत करने के उपाय करे तो आपसी आकर्षण को बढ़ाया जा सकता है। कुंडली में शुक्र रोमांस और प्रेम का कारक माना गया है।

8. सांस्कृतिक अंतर– पति-पत्नी दोनों विभिन्न संस्कृतियों से संबंधित हो सकते हैं और इसलिए उनकी सोच व मूल्यों में अंतर मिलना स्वाभाविक है। यह युगल के बीच असहमति और कड़वाहट का प्रमुख कारण बन सकता है।

9. ससुराल पक्ष का हस्तक्षेप– कुछ मामलों में, लड़की अपने ससुराल वालों से उनके अत्यधिक हस्तक्षेप के कारण तंग आ जाती है और उसके लिए ससुराल में समायोजन करना मुश्किल हो जाता है। यह धीरे-धीरे वैवाहिक जोड़े के बीच मतभेद पैदा करता है। जातक के लिए चौथा और दसवां घर क्रमशः ससुर और सास का घर होता है। एक ज्योतिषी इन भावों को सुधारने के उपाय सुझा सकता है ताकि उनके वैवाहिक संबंधों को बेहतर बनाया जा सके।

10. उम्र में अंतर– आमतौर पर लोग शादी करते समय उम्र के अंतर पर विचार करते हैं लेकिन कुछ मामलों में अलग-अलग उम्र के लोग आपस में शादी कर लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप जीवन में विचारों और वरीयताओं में अंतर होता है। उम्र में बड़ा साथी छोटे को उबाऊ लग सकता है जबकि बड़े साथी को उम्र में छोटा साथी बहुत बचकाना लग सकता है। शनि ग्रह आमतौर पर विवाहित संबंधों में उम्र का अंतर देता है जिसे शनि ग्रह के सबसे प्रभावी उपायों से निपटाया जा सकता है ताकि जोड़े के जीवन में इसके बुरे प्रभावों को कम किया जा सके।

कैसे एक ज्योतिषी आपको एक सुखी वैवाहिक जीवन जीने में मदद कर सकता है?

हमारी जन्म कुंडली हमारे पूरे जीवन का रिकॉर्ड है। इसके माध्यम से कुछ भी देखा व जाना जा सकता है। एक ज्योतिषी जातक की जन्म कुंडली पर एक नज़र डालते ही वैवाहिक जीवन का सम्पूर्ण ब्यौरा दे सकता है। सप्तम भाव और उसके स्वामी की दशा वैवाहिक जीवन में समस्या का संकेत देती है। यह समझना जरूरी है कि अगर ज्योतिषीय योग काम करते हैं तो ज्योतिषीय उपाय भी अवश्य ही काम करते हैं। 

ज्योतिष किसी भी प्रकार की वैवाहिक समस्या का 100 प्रतिशत समाधान कर सकता है। केवल एक विद्वान ज्योतिषी ही विवाह की सही भविष्यवाणी कर सकता है जो समस्या को एक सही मायने में हल करेगा। ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करने के उपाय किए जाते हैं। एक बार पाप प्रभाव कम हो जाने के बाद, जातक तार्किक रूप से सोचने लगता है। जातक को हर तरफ से अपने वैवाहिक जीवन को मजबूत करने में मदद मिलने लगती है और यह सब चमत्कारिक ढंग से होने लगता है। रत्न , रुद्राक्ष, दान, मंत्र जप, यंत्र और पूजा आदि ज्योतिषीय उपायों की शक्ति से आप पूर्णतः चकित रह जाएंगे।

शादी बचाने के कारगर उपाय

  • ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें यह मंत्र भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है और इससे जातक के लिए वैवाहिक आनंद का कारक बृहस्पति ग्रह को भी मजबूत बनाया जा सकता है।
  • दांपत्य जीवन को सुचारू बनाने के लिए गुरुवार का व्रत करना भी एक और कारगर उपाय है। यह ज्यादातर महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • पुरुष शुक्रवार को उपवास रख सकते हैं और देवी लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं।
  • ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए पक्षियों को पिंजरों से मुक्त किया जा सकता है।
  • काले रंग के कपड़े पहनने से बचें, इसके बजाय पीले और गुलाबी रंग के कपड़े पहने जा सकते हैं।
  • भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करें।
  • शनिवार के दिन गरीबों को उड़द की दाल के वड़े खिलाएं।
  • लगातार 3 शनिवार तक काले तिल, काला चना या काली उड़द की दाल का दान करें।

रिश्ता तोड़ने की जल्दबाजी न करें और तार्किक रूप से सोचें

रिश्तों में बहुत कड़वाहट आने पर अलग रहने या तलाक लेने का फैसला करना आम बात है। हालांकि, हड़बड़ी में निर्णय लेना उचित नहीं है। सिर्फ इसलिए कि आप किसी व्यक्ति को पसंद नहीं करते हैं, किसी भी रिश्ते को तोड़ने का निर्णय लेना समझदारी नहीं है। एक व्यक्ति तलाक लेने के बाद किसी अन्य साथी के साथ खुशी से रहने का सपना देख सकता है लेकिन आपको याद दिला दें, एक पीड़ित 7वां घर आपको बसने नहीं देगा चाहे आप कितने भी साथी बदल लें! अलग-अलग संख्या में विवाह के लिए अलग-अलग घर होते हैं लेकिन सातवां घर आपके वैवाहिक जीवन की समग्र तस्वीर देने वाला मुख्य घर है। यह जरूरी नहीं है कि रिश्ता टूटने के बाद आपको कोई और साथी मिल जाए जो आपके लिए ज्यादा अनुकूल हो। इसके अलावा, वैवाहिक जीवन में परेशानियाँ व्यवसाय और करियर में भी परेशानी देती हैं क्योंकि 7 वां घर जातक के करियर और काम से भी जुड़ा होता है। अपने विवाह की सही तस्वीर को समझने के लिए ज्योतिषीय मार्गदर्शन लें। हो सकता है आपका अनुभवी ज्योतिषी आपको वो दिखा दे जो आप अभी तक नहीं देख पाएं हो!

 

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