Sunday, January 20, 2019

वर्तमान समय में शिक्षा शब्द का अर्थ आजीविका हेतु योग्यता एवं उत्तम ज्ञान प्राप्त करना है | शिक्षा मनुष्य के उदार , चरित्रवान , विद्वान , और विचारवान बनाने के साथ – साथ उसमें नैतिकता , समाज और राष्ट्र के प्रति उसके कर्तव्य और मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था की भावना का संचार भी करती है | शिक्षित लोग भिन्न – भिन्न ढंग से मानवता की सेवा करते हैं |

शिक्षा मनुष्य को विनयशील बनाती है | कहा गया है –

विद्या ददाति विनयम् विनयाद्याती पात्रताम् |

पात्रत्वा धनमाप्नोति धनात् धर्मम् ततो सुखम् ||

अर्थात विद्या से विनयशीलता आती है , विनयशीलता से योग्यता और योग्यता हो तो धन की प्राप्ति होती है |

धन हो तो मनुष्य के मन में धर्म के प्रति आस्था का संचार होता है और जहां धर्म होता है और फिर उसे सुखों की प्राप्ति होती है |

प्रत्येक माता – पिता का यह परम् कर्तव्य है कि वे अपनी संतान की यथेष्ठ शिक्षा की व्यवस्था करें | चाणक्य ने भी कहा है कि संतान को विद्या में लगाना चाहिए क्योंकि

नीतिका: शील सम्पन्ना: भवति कुल पूजिता: ‘|

अर्थात नीतिमान तथा शील संपन्न कुल में नीतिमान तथा शील संपन्न व्यक्ति का ही पूजन होता है |

जो माता पिता अपनी संतान के पठन – पाठन के प्रति सजग नहीं रहते उनके प्रसंग में कहा गया है –

माता शत्रु: पिता बैरी येन बालको पाठित: |

शोभते सभा मध्ये हंसा: मध्यें वको यथा ||

उच्च शिक्षा हेतु किसी भी छात्र की द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, नवम तथा एकादश भावक का सम्यक विवेचन आपेक्षित है | इनके भावेशों की सुदृढ़ता तथा नवांशों में शुभ ग्रहों के होने पर उच्च शिक्षा का योग बनता है | इसके अलावा इन भावों की संधि के नक्षत्रों के नवमेश तथा उनके उपस्वामी के भावों के साथ अंतर सम्बन्ध होना चाहिए | जन्म कुंडली में बुधादित्य योग , गज केसरी योग , उपाध्याय योग ( गुरु तथा सूर्य का द्विग्रह  योग , हंस योग , सरस्वती योग आदि भी होने चाहिए |

द्वितीय भाव – विद्या अर्जन का भाव है | आज शिक्षा प्राप्ति के लिए आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होना आवश्यक है द्वितीयेश तथा लाभेश केंद्र में हों तथा दोनों के बीच गृह परिवर्तन हो तो व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है |

चतुर्थ भाव- शिक्षण संस्था का सूचक है | चतुर्थेश बली हो तो व्यक्ति का नामांकन सुन्दर और बड़े शिक्षा संस्थानों में होता है |

पंचम भाव- मेधा शक्ति बौद्धिक क्षमता का भाव है | पंचमेश , पंचमेश का अन्य ग्रहों से सम्बन्ध , पंचम भावस्थ ग्रह आदि किसी की बुद्धि के स्तर तथा मेधा शक्ति के सूचक है |

नवम भाव – उच्च शिक्षा का कारक है | नवम तथा नवमेश के सुदृण होने और नवमेश का नवांश वर्गोत्तम या शुभ वर्ग होने पर उच्च शिक्षा का योग बनता है |

एकादश भाव – विद्या लाभ का कारक है | मजबूत एकादशेश का नवमेश तथा पंचमेश के साथ केंद्र  त्रिकोण में दृष्टि या युति सम्बन्ध हो तो उच्च शिक्षा का योग बनता है |

चंद्र : किसी मेधा शक्ति की जानकारी उसके चंद्र की स्थिति से प्राप्त की जाती है | चंद्र के बलाबल से ही उसकी मेधा शक्ति का पता चलता है | चंद्र दुर्बल हो तथा दु:स्थान में हो तो व्यक्ति की स्मरण शक्ति दुर्बल होती है | बली चंद्र केंद्र त्रिकोण तथा शुक्ल पक्ष की पंचमी तक हो , तो व्यक्ति की स्मरण शक्ति काफी मजबूत होती है | देखा गया है कि चंद्र वृश्चिक का हो तो , स्मरण शक्ति काफी मजबूत होती है |

बुध – गणितीय क्षमता , अभिव्यक्ति और आंकलन की क्षमता , सहज बुद्धि , विश्लेषण क्षमता , वाक् शक्ति , विश्लेषण क्षमता लेखन क्षमता आदि का पता बुध ग्रह के बलाबल से चलता है |

सूर्य – सूर्य तेजस्विता तथा सफलता का द्योतक है | सूर्य की मजबूती से छात्र महाविद्यालय या विश्व विद्यालय में अच्छा स्थान प्राप्त करते हैं |

शनि , राहु , केतु तथा मंगल – इनकी भूमिका उच्च तकनीकी शिक्षा में अहम् होती है | अत: पंचम तथा नवम का उनके साथ सम्बन्ध होने से व्यक्ति तकनीकी शिक्षा प्राप्त करता है |

उच्च शिक्षा प्राप्त करने के तीन मार्ग हैं –

  • योग्यता के आधार पर राजकीय शिक्षण संस्थाओं में नामांकन से और डोनेशन देकर प्रबंधन पाठ्यक्रम में नामांकन से |
  • योग्यता के आधार पर चयनित प्रतिभावान छात्र प्रतियोगिता परीक्षा में सफल होते हैं और उनका नामांकन राजकीय शिक्षण संस्थाओं में होता है | ऐसे छात्रों की जन्मकुंडली गुरु केंद्र या त्रिकोण में बलि होता है | एकादशेश , पंचमेश तथा नवमेश भी केंद्र त्रिकोण तथा एकादश भाव में होते हैं और वे शुभ नवांश के होते हैं | इन भावों की संधियों के नक्षत्रों के स्वामियों का सम्बन्ध होता है | साथ ही इनकी दशा , अंतर्दशा और प्रत्यन्तर्दशा का भी भोग्य काल होता है |
  • पेमेंट – इस शीट पर उच्च शिक्षा में नामांकन हेतु प्रतियोगिता परीक्षा में योग्यता के आधार पर चयनित होना पड़ता है | जन्मकुंडली में द्वितीय , पंचम तथा नवम तथा एकादश भाव की संधियों के नक्षत्रों के स्वामियों या केंद्र में या द्वितीय भाव में होता है | तथा पंचम , नवम और द्वितीय भावों के स्वामियों के नक्षत्र के साथ यथा द्वादश भाव की संधि के नक्षत्र के स्वामियों के उपस्वामियों का सम्बन्ध इनके साथ हो , तो इस स्थिति में पेमेंट शीट पर नामांकन होता है |
  • डोनेशन – पंचमेश या नवमेश बली होकर केंद्र या त्रिकोण में हो तथा दोनों का द्वादशेश से युति या दृष्टि सम्बन्ध हो और पंचमेश , नवमेश तथा द्वितीयेश के नवांश में यदि द्वादशेश पड़ता हो तो डोनेशन के द्वारा नामांकन होता है | नवमेश की संधि के नक्षत्र के स्वामी का उपस्वामी यदि द्वादशेश की संधि का उपस्वामी हो , तो डोनेशन के द्वारा नामांकन होता है |

विदेश शिक्षा – यदि पंचमेश , नवमेश तथा चतुर्थेश का सम्बन्ध या इनके उपस्वामियों का सम्बन्ध युति दृष्टि या अन्य ढंग से द्वादश एवं अष्टम भाव से हो तो विदेश शिक्षा का योग बनता है | उक्त स्थिति के साथ ही यदि नवमेश पक्षी द्रेष्काण में हो तो इस स्थिति में भी विदेश शिक्षा हेतु या किसी विषय में विशेषग्यता हेतु विदेश शिक्षा का योग बनता है |

पंचम तथा नवम भाव जिस जिस गृह के प्रभाव में होते हैं व्यक्ति की शिक्षा उस ग्रह से सम्बंधित विषयों में होती है | ग्रहों के सम्बंधित विषयों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है |

सूर्य : प्रशासन राजनीति शास्त्र , दवा रसायन आदि |

चंद्र : नौ सैन्य शिक्षा , समुद्र अभियंत्रण , मत्स्य पालन , शुगर टेक्नोलॉजी , संगीत ,नर्स ,गृहविज्ञान , टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी , खेती मनोविज्ञान आदि |

गुरु : विधि शिक्षा शास्त्र , धर्मशास्त्र, नीतिशास्त्र , जीव विज्ञानं , मानवशास्त्र , समाज विज्ञान आदि |

मंगल : सभी प्रकार का अभियंत्रण विशेषकर मेटलर्जी तथा माइनिंग , सर्जरी , पदार्थ विज्ञान , दवा , युद्ध  विद्या आदि |

बुध : वाणिज्य , चार्टेड अकॉउंटेन्सी बैंकिंग , टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी , अर्थशास्त्र , पत्रकारिता, गणित आर्किटेक आदि |

शनि : कृषि मैकैनिकल इंजीनियरिंग , आकिओलॉजी , इतिहास , वनस्पति शास्त्र , ज्योतिष |

राहु केतु : ज्योतिष, तंत्र, लेदर टेक्नोलॉजी , विष विद्या , कंप्यूटर विज्ञान , इलेक्ट्रॉनिक्स , टेलीकम्युनिकेशन आदि |

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