वृश्चिक राशि

( तो , ना, नी, नू, ने , नो , या , यी , यू )

व्यवसाय:

व्यापार और नौकरी की दृष्टि से यह वर्ष सामान्य ही रहेगा | इस राशि पर शनि की साढ़े साती का प्रभाव है व्यापारीजनों को कहीं भी निवेश करने से पहले सतर्कता की आवश्यकता होगी जिससे लाभ के स्थान पर हानि का सामना न करना पड़े | नौकरी कर रहे जातकों के के लिए भी किसी विशेष  लाभ की अनुभूति नहीं है जहाँ कार्य कर रहे है वहीं कार्यरत रहेंगे वरिष्ठ अधिकारिओं से वैचारिक मतभेद रह सकता है जिसके कारण मन असंतुष्ट रहेगा |

धन – संपत्ति:

निवेश के लिए यह वर्ष आपके अनुकूल नहीं है | यदि आप इस वर्ष अपने जीवन साथी के साथ मिलकर निवेश करते हैं तो लाभ के योग हैं | निवेश अच्छी तरह जांच -पड़ताल और सूझ-बूझ के साथ करने की आवश्यकता है | लाभ के योग कम है और व्यय अधिक होगा जिससे मन अशांत रहेगा | अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें | अनावश्यक विवादों में न पड़ें अन्यथा व्यर्थ में शत्रु बनेंगे |

घरसमाज –परिवार:

आपका मन व्यथित रहेगा लेकिन घर का वातावरण शांत एवं सुखमय होगा | इसलिए आप अधिक से अधिक समय घर – परिवार के साथ बिताना पसंद करेंगे | घर – परिवार एवं जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा | जिससे मानसिक शांति मिलेगी |

स्वास्थ्य :

इस वर्ष आप मानसिक तौर पर परेशान रह सकते हैं | कार्य – व्यवसाय को लेकर तनाव ग्रस्त रहेंगे | यदि आप नकारात्मक विचारों को अपने मन से निकाल सकारात्मक वैचारिक धारा अपनाएंगे तो स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और मन भी शांत रहेगा |

कैरियर एवं प्रतियोगी परीक्षाएं :

विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष अनुकूल नहीं है | इस वर्ष सफलता प्राप्त करने के लिए उन्हें अथक प्रयास और एकचित मन से अध्ययन की आवश्यकता है | और सभी कार्यों  से अपना ध्यान हटाकर सिर्फ अध्ययन में अत्यधिक परिश्रम करना होगा तब ही सफलता प्राप्त  कर पाएंगे |

यात्रा प्रवास – तबादला :

वर्ष का  पूर्वार्द्ध  यात्राओं के लिए शुभ नहीं है | पूर्वार्द्ध में जहाँ तक संभव हो यात्राओं को टाल दें अन्यथा यात्राओं से अनावश्यक कष्ट की सम्भावना है | वर्ष का मध्यान्ह यात्राओं  के लिए उचित है | इस समय की गयी यात्राएं शुभ एवं मंगल दायी होंगी | स्थानांतरण के लिए भी यह वर्ष सही नहीं है |

धर्म – कार्य – ग्रह शांति :

परिवार में कोई धार्मिक कार्य , कोई पूजा – अनुष्ठान आदि संपन्न हो सकता है | इस वर्ष आप भगवान हनुमान जी की पूजा करें  | प्रत्येक शनिवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ करें , जिससे मन शांत रहेगा और प्रगति के मार्ग खुलेंगे  | आलस्य को अपने ऊपर हावी न होने दें | अन्यथा प्रगति के मार्ग में बाधक साबित होगा |

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