पितृ ऋण

पितृ ऋण से तातपर्य जातक पर अपने पूर्वजों के बुरे कर्मों का प्रभाव होने से है | यदि जातक की जन्म कुंडली में स्वयं की राशि के अधिपति ग्रह का शत्रु बैठा हो और स्वयं की राशि का ग्रह भी स्वयं भी अशुभ  हो तो जातक पर पितृ ऋण होता है | पितृ ऋण जन्मकुंडली से देखा जाता है | जिनकी कुंडली में पितृऋण होता है उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है योग्य होने के बाद भी बार – बार विफलता का सामना करना पड़ता है तथा तरक्की में रुकावटें आती हैं

पितृ ऋण होने पर जातक को दोनों ग्रहों का उपह करना चाहिए पहले तो स्वयं कि राशि के अधिपति का दूसरा उसकी स्वयं की राशि में उपस्थित शत्रु ग्रह का |

कभी भी एक साथ दोनों ग्रहों के उपाय नहीं करने चाहिए ऐसा करने पर कोई भी किया गया उपाय फलित नहीं होता | पहले स्वयं की राशि के अधिपति ग्रह का उपाय करें तथा उसके बीच कुछ समय के अंतर के पश्चात् दूसरे शत्रु ग्रह का उपाय करना चाहिए | पितृ ऋण का कोई भी उपाय ४०/४३ सप्ताह तक करना आवश्यक होता है |

पितृ ऋण का उपाय जातक के घर के सभी सगे संबंधियों जहाँ तक खून का रिश्ता हो करना चाहिए | उसम सभी का बराबर मात्रा में सहयोग करना अति आवश्यक है यदि कोई भी सहयोग देने में असफल हो तो उसके हिस्से का देश गुना स्वयं डालना चाहिए | पितृ ऋण में जातक की बेटी , बहन , बहु और इन सबकी संतानों का हिस्सा भी आवश्यक होता है चाहे वह संतान पुरुष हो या स्त्री |

पितृ ऋण की स्थिति :

घर नौवें हो ग्रह कोई बैठा , बुध बैठा जड़ साथी हो |

पितृ ऋण उस घर से होगा , असर ग्रह सब निष्फल हो ||

  • पितृ जड़ की प्रथम स्थिति जब बुध जड़ में बैठा हो :
  • यदि बृहस्पति नौवें भाव में और बुध द्वादश भाव में हो |
  • यदि सूर्य नौवें भाव में और बुध पांचवें भाव में हो |
  • यदि चंद्र नौवें भाव में और बुध हो लग्न या अष्टम भाव में |
  • यदि शुक्र नौवें भाव में और बुध हो द्वितीय या सप्तम भाव में |
  • यदि शनि नौवें भाव में हो और बुध दशम या एकादश भाव में हो |
  • यदि केतु नौवें भाव में और बुध षष्ठ भाव में हो |

साथी ग्रह जब जड़ कोई काटे , दृष्टि मगर वह दुपाता हो | 5 ,12 , 2 , 9 कोई मंद , ऋण पितर बन जाता हो || “

पितृ ऋण की दूसरी स्थिति

  • यदि बृहस्पति 2 , 3 , 5 ,6 ,9  या 12  वें भाव से बाहर स्थित हो और दूसरे भाव में शनि ,अथवा पांचवे में शुक्र , अथवा नौवें भाव में बुध या १२वें में राहु या तीसरे या छठे भाव में बुध , शुक्र या शनि स्थित हो | ( पितृ ऋण )
  • यदि दो से सातवें भाव में सूर्य , चंद्र व राहु में से कोई एक या एक से ज्यादा हों और शुक्र पहले और आठवें भाव से बाहर स्थित हो (स्त्री ऋण )
  • यदि चौथे भाव में केतु स्थित हो और चंद्र चौथे भाव से बाहर स्थित हो (मातृ ऋण ) |
  • यदि पांचवे भाव में शुक्र या पापी ग्रह स्थित हो और सूर्य एक और ग्यारहवें भाव से बाहर स्थित हो ( जाति ऋण )
  • यदि छठे भाव में चंद्र, मंगल हो और केतु दूसरे भाव से बाहर हो ( दरगाही ऋण )| 
  • यदि १-८ में बुध, केतु हो और मंगल सातवें भाव से बाहर हो | ( रिश्तेदारी का ऋण )
  • यदि 3-6 भाव में चंद्र हो और यदि बुध 2-12 से बाहर हो | ( बहन का ऋण )
  • यदि 12 वें भाव में सूर्य, शुक्र व मंगल हो और राहु 6 भाव से बाहर हो  ( अजन्मे का ऋण) |
  • यदि 10-11 में सूर्य, चंद्र , मंगल हो और शनि 3-4 भाव से बाहर हो ( जालिमाना ऋण ) |

इसके साथ – साथ नौवां भाव भी अशुभ हो तो ही पितृ ऋण होगा |

इस प्रकार पितृ ऋण की तीन शर्तें होंगी :

  1. कुंडली के नवम भाव में कोई भी ग्रह स्थित हो और उसकी राशि में बुध बैठ जाये |
  2. किसी ग्रह की राशि में शत्रु ग्रह बैठ जाएँ और शत्रु ग्रहों पर उस राशि के स्वामी का कोई प्रभाव न हो यानी ग्रहों का अपनी राशि में स्थित ग्रहों से युति व दृष्टि सम्बन्ध न हों |
  3. बृहस्पति के पक्के ग्रहों ( 2,5,9,12 ) में उसके शत्रु ग्रह ( बुध , शुक्र ) बैठे हों |

पितृ ऋण को दूर करने के लिए एक तो उस ग्रह का उपाय करेंगे जो खुद अशुभ हो रहा हो और दूसरा उसका जो उसकी जड़ यानी राशि में बैठकर उसको अशुभ कर रहा हो |

पितृ ऋण दूर करने के उपाय

  • पितृ ऋण का उपाय ४०-४३ सप्ताह तक करना चाहिए और उपाय करने के लिए परिवार के सभी सदस्य मतलव जहाँ तक भी खून का रिश्ता हो सभी को  हिस्सा डालना चाहिए यदि कोई हिस्सा डालने में असमर्थ हो उसके बदले का दस गुना स्वयं डालना चाहिए |
  • बृहस्पति : बृहस्पति ग्रह का पितृ ऋण होने पर पर खानदान के प्रत्येक व्यक्ति से बराबर पैसा लेकर इकट्ठा कर एक ही दिन मंदिर में दान करना चाहिए |
  • चंद्र : जातक का जहाँ तक खून का संबंध हो सभी सदस्यों से बराबर-बराबर चाँदी लेकर इकट्ठी कर एक बार में चलते पानी में बहा देनी चाहिए |
  • सूर्य – खानदान के प्रत्येक सदस्य से एकसमान पैसा लेकर एक ही दिन में मंदिर में यज्ञ करना चाहिए |
  • बुध : परिवार के सभी सगे सम्बन्धी (जहां तक खून का सम्बन्ध हो ) से एक – एक पीले रंग की कौड़ी लेकर एक साथ जला दें और वह राख चलते पानी में बहा दें |
  • शुक्र : सभी सम्बन्धी से पैसे इकट्ठे कर सौ गायों को जो कि अंगहीन न हों एक हिन् दिन में खाना खिलाएं |
  • मंगल : सभी सगे संबंधियों से बराबर पैसा लेकर इकट्ठे कर किसी डॉक्टर को मुफ्त दवा बांटने को दें |
  • राहु : खानदान के सभी सगे सम्बन्धियों से एक – एक नारियल लेकर इकट्ठे कर चले पानी में प्रवाहित कर दें
  • केतु : पूरे खानदान के इकट्ठे किये धन से १०० कुत्तों को एक दिन में खाना खिलाएं |
  • शनि : कुल खानदान के व्यक्तियों से इकट्ठे किये गए पैसों से अलग – अलग जगह कि मछलिओं में एक ही दिन में खाना खिलाएं या उन पैसो से एक दिन में १०० श्रमिकों को खाना खिलवाएं |

 

 

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